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एमडीएम में आखिर कहां से आएगा दूध

Tue, 14 Jul 2015 10:11 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो/सुल्तानपुर
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सुल्तानपुर। मध्याह्न भोजन योजना के तहत सप्ताह में एक दिन बुधवार को बच्चों को ताजा व गरम दूध पिलाने को लेकर शिक्षकों व अधिकारियों के सामने नई मुसीबत खड़ी हो गई है। मांग के सापेक्ष जिले में दूध ही नहीं है। विद्यालयों में बच्चों की नियमित मात्र 52 फीसदी उपस्थिति मानी जाए तो करीब 27 हजार लीटर दूध की आवश्यकता है, जबकि जिले में दुग्ध उत्पादन मात्र 20 हजार लीटर है। करीब 07 हजार लीटर दूध की आपूर्ति कहां से पूरी की जाएगी यह अधिकारियों व शिक्षकों के लिए बड़ा सवाल है। विद्यार्थियों की उपस्थिति बढ़ने पर यह समस्या और बढ़ेगी।
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जिले के 1725 प्राथमिक और 713 उच्च प्राथमिक विद्यालयों में मध्याह्न भोजन योजना का संचालन हो रहा है। विभागीय आंकड़ों के मुताबिक प्राथमिक में एक लाख 76 हजार 745 और उच्च प्राथमिक स्तर पर 78 हजार 515 छात्र-छात्राएं नामांकित हैं। शासन ने एमडीएम में बच्चों को शुद्घ और गरम दूध पिलाने का फरमान जारी किया है। एमडीएम के मेन्यू में सप्ताह में बुधवार को प्रति छात्र 200 एमएल दूध पिलाने का लक्ष्य निर्धारित है।

जिले के विभागीय आंकड़ों की मानें तो छात्र-छात्राओं की औसतन उपस्थिति 52 प्रतिशत है। इस हिसाब से बुधवार के दिन एक लाख 32 हजार 736 बच्चों के लिए दूध की आवश्यकता होगी। इतने बच्चों को 200 एमएल के हिसाब से 26 हजार 548 लीटर दूध की जरूरत है जबकि जिले में मात्र 20 हजार लीटर दूध की ही उपलब्धता है। उपलब्ध दूध से ही लोगों की दैनिक जरूरत भी पूरी हो रही है। ऐसे में गुरुजनों के लिए एमडीएम में शुद्घ व गुणवत्तापरक दूध पिलाना टेढ़ी खीर साबित होगा। वहीं, शासन की मंशानुरूप बीएसए, खंड शिक्षाधिकारी, एबीआरसी आदि मिलकर बच्चों की उपस्थिति बढ़ाने के लिए तमाम प्रयास कर रहे हैं। यदि उपस्थिति बढ़ती है तो समस्या और बढ़ेगी।
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