सुल्तानपुर। पति से गुजारा भत्ता की धनराशि पाने के लिए नाबालिग बेटे के साथ तीन वर्ष से अदालत का चक्कर काट रही विवाहिता को फैमिली कोर्ट से बड़ी राहत मिल गई है।
फैमिली कोर्ट के प्रधान न्यायाधीश मनोज कुमार शुक्ल ने विवाहिता के केस का निस्तारण करते हुए उसे पति से मुकदमा दायर करने की तिथि से प्रत्येक माह 10 हजार रुपये गुजारा भत्ता की धनराशि दिलाए जाने का आदेश दिया है। मामला जयसिंहपुर कोतवाली क्षेत्र के बगिया गांव से जुड़ा है।
बगिया गांव निवासी मो. हफीज की पुत्री हसबुन निशां की शादी 12 दिसंबर 2012 को जौनपुर जिले के सरपतहा थाने के बरऊद गांव निवासी मो. जावेद के साथ हुई थी।
दहेज में एक लाख रुपये नगदी व सोने की चेन की मांग को लेकर ससुरालीजन हसबुन निशां को प्रताड़ित कर रहे थे। आरोप है कि दहेज की मांग पूरी नहीं होने पर पति व अन्य ससुरालीजनों ने हसबुन निशां को पांच अप्रैल 2015 को मारपीट कर उसके नाबालिग पुत्र आवेश के साथ मायके में लाकर छोड़ दिया था।
तीन अगस्त 2015 को हसबुन निशां ने कोर्ट में केस दायर करके पति से 20 हजार रुपये गुजारा भत्ता दिलाए जाने की मांग की थी। गुजारा की धनराशि पाने के लिए पीड़िता अपने नाबालिग बेटे के साथ करीब तीन वर्ष से कोर्ट का चक्कर काट रही थी।
फैमिली कोर्ट के प्रधान न्यायाधीश मनोज कुमार शुक्ल के सामने मामला पेश हुआ तो उन्होंने पीड़िता के पक्ष में फैसला सुनाया। कोर्ट ने पति मो. जावेद को आदेश दिया है कि वह अपनी पत्नी व पुत्र के गुजारे के लिए उन्हें केस दायर करने की तिथि से प्रत्येक माह 10 हजार रुपये की धनराशि अदा करें। गुजारा की धनराशि प्रत्येक माह की सात तारीख को देनी होगी।