सुल्तानपुर। बेसिक शिक्षा विभाग में एजुकेटरों व तकनीकी अनुदेशकों की भर्ती के मामले में फर्म के चयन में नियमों को दरकिनार कर दिया गया। पूर्व सांसद की ओर से शिकायत किए जाने के बाद भी अधिकारियों ने नियमों का संज्ञान नहीं लिया। योजनाबद्ध तरीके से भर्ती के लिए फर्म का चयन कर लिया गया।
पूर्व सांसद रविंदर कुशवाहा बेसिक शिक्षा मंत्री को संबोधित दिए शिकायती पत्र में बीएसए कार्यालय की ओर से एजुकेटरों व तकनीकी अनुदेशकों की भर्ती में फर्म के चयन में अनियमितता का आरोप लगा चुके हैं। उनके मुताबिक ईएमडी की मूल प्रति जमा नहीं होने पर किसी फर्म को अयोग्य घोषित नहीं किया जा सकता। उन्होंने 26 नवंबर 2024 को जारी जेम शासनादेश का हवाला भी दिया। इसके साथ चयनित फर्म के पास समान प्रकृति का अनुभव नहीं होने का आरोप भी लगाया।
15 दिसंबर को पूर्व सांसद के लिखे पत्र के बाद भी बेसिक शिक्षा विभाग ने इस पर ध्यान नहीं दिया। पूर्व सांसद ने सेटिंग-गेटिंग के आधार पर ही फर्म के चयन का आरोप लगाया है। इन शिकायतों को नजरअंदाज किए जाने से जाहिर होता है कि योजनाबद्ध तरीके से चहेती फर्म का चयन भर्ती के लिए कर लिया गया। सीडीओ की ओर से फर्म पर कार्रवाई के बाद से मामला सुर्खियों में चल रहा है। होली बाद मामले में और कार्रवाई होने की संभावना जताई जा रही है।
अधिकारियों के विश्वास पर कर दिए हस्ताक्षर
मुख्य विकास अधिकारी अंकुर कौशिक ने बताया कि डीएम ने समिति का चेयरमैन मुझे बनाया था। समिति के अन्य अधिकारियों के विश्वास में मैंने हस्ताक्षर कर दिया। होली बाद इसकी छानबीन कराई जाएगी।