चरनी में विराजमान प्रभु यीशु। संवाद
सुल्तानपुर। क्रिसमस का त्योहार धूमधाम के साथ मनाया गया। बुधवार रात 12 बजे गिरजाघरों में प्रभु यीशु के जन्म लेते ही प्रार्थना सभाएं होने लगीं। सेंट पॉल कैथोलिक चर्च और क्राइस्ट चर्च में एक साथ कार्यक्रम हुए। कैंडल जलाकर और केक काटकर प्रभु यीशु के आगमन की खुशियां मनाई गईं। देर शाम दोनों चर्च रंग-बिरंगी रोशनी से जगमग हो उठे।
शहर के दोनों चर्चों में क्रिसमस का उल्लास नजर आया। आधी रात चरनी में प्रभु यीशु के जन्म लेते ही उनके गीत गाए जाने लगे। यीशु के जीवन से जुड़ी कई झांकियां भी मनमोहक तरीके से सजाई गईं थीं। ईसाई समाज के काफी लोगों ने इन कार्यक्रमों में हिस्सा लिया। उन्होंने एक-दूसरे का मुंह मीठा कराकर केक खिलाया। सेंट पॉल कैथोलिक चर्च के फादर डेमियन गोम्स ने प्रभु यीशु के जीवन से जुड़े कई संस्मरण को साझा किया। बताया कि क्रिसमस का त्योहार शांति का प्रतीक माना जाता है। क्राइस्ट चर्च के फादर डॉ. अखिलेश कुमार माथुर ने कहा कि हजारों साल पहले आए प्रभु यीशु ने इस धरती पर शांति का पैगाम दिया।
क्रिसमस की पूरी हुई तैयारी
हमने घर पर पारंपरिक केक और कुकीज बनाने की पूरी तैयारी कर ली है। बच्चों की खुशी देखते ही बन रही है। सांता ड्रेस, लाइटिंग और सजावट का सामान आ गया है। - श्वेता डीन।
कैरल की लगातार चल रही रिहर्सल
चर्च में स्टेज सजावट और कैरल की एक सप्ताह से रिहर्सल लगातार चल रही है। क्रिसमस पर भजन-धुन और बच्चों की प्रस्तुति खास रहने वाली है। इसके लिए सबको उत्सुकता है। - तानिया सिंह।