विषैले जंतुओं के काटने का खतरा
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करोड़ों रुपये खर्च के बावजूद परिषदीय स्कूलों की दुश्वारियां दूर होने का नाम नहीं ले रही हैं। हालत यह है कि क्षेत्र के प्राथमिक विद्यालय शुकुलपुर में पहुंचने के लिए रास्ता ही नहीं है। बरसात के महीने में बच्चे और शिक्षक घुटना भर पानी में घुसकर स्कूल आने-जाने को मजबूर हैं। बच्चों और शिक्षकों को विषैले जंतुओं का खतरा बना रहता है।
स्थानीय विकास क्षेत्र के शुकुलपुर गांव में 20 साल पहले प्राथमिक विद्यालय का निर्माण हुआ था। उस समय विद्यालय के आसपास के खेत खाली पड़े थे और किसान उसकी जोताई-बोआई नहीं करवाते थे। धीरे-धीरे किसानों ने अपनी जमीन पर फसलें उगानी शुरू कर दीं। करीब 10 साल से प्राथमिक विद्यालय शुकुलपुर के बच्चे व शिक्षक बारिश के मौसम में खेतों में भरे पानी से होकर आने-जाने को मजबूर हैं। मुख्य मार्ग से विद्यालय तक पहुंचने का कोई रास्ता नहीं है।
विद्यालय से बिल्कुल सटा गांव के ही रविशंकर मिश्र व पारसनाथ का खेत है। उसी खेत से बच्चों व शिक्षकों का आना-जाना होता है। बारिश के मौसम में खेतों मे पानी भर जाने से बच्चों व शिक्षकों को पानी व कीचड़ से होकर गुजरना पड़ रहा है। इस वद्यालय में कुल 250 छात्र-छात्राएं पंजीकृत हैं। प्रधानाध्यापक भूपेंद्र कुमार, शिक्षक अरविंद यादव व सहायक अध्यापक सुरेंद्र यादव शिक्षण कार्य करते हैं। प्रधानाध्यापक ने बताया कि आए दिन पानी व कीचड़ में फिसलकर गिरने से बच्चे चोटिल होते रहते हैं।