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दो हत्यारों को आजीवन कारावास

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सुल्तानपुर। 12 वर्ष पूर्व हत्या कर सबूत मिटाने के लिए शव गोमती नदी में फेंक देने के मामले में एडीजे अभय श्रीवास्तव ने बुधवार को दो अभियुक्तों को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास व एक लाख 10 हजार रुपये जुर्माना की सजा सुनाई है। कोर्ट ने जुर्माना से 80 हजार रुपये की राशि मृतक की पत्नी को देने का आदेश दिया है। मामला गोसाईंगंज थाने से जुड़ा है।
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अभियोजन पक्ष के मुताबिक कोतवाली देहात थाने के बरुई गांव निवासी अमर बहादुर के भाई दयाशंकर को 22 जुलाई 2010 की रात में गोसाईगंज थाने के मधुवन गांव निवासी शिवभोले निषाद ने फोन करके अपने घर बुलाया था। दयाशंकर दूसरे दिन 23 जुलाई 2010 को सुबह करीब छह बजे शिवभोले के घर मधुवन गया था। वहां से वापस नहीं लौटने पर परिवारीजनों से दयाशंकर की काफी खोजबीन की, लेकिन कोई पता नहीं चला। 24 जुलाई 2010 को दयाशंकर का शव बेलहरी घाट पर गोमती नदी में पाया गया था।
आरोप है कि अभियुक्तों ने दयाशंकर की हत्या कर सबूत मिटाने के लिए लाश गोमती नदी में फेंक दी थी। गोसाईंगंज थाने की पुलिस ने मृतक के भाई अमर बहादुर की तहरीर पर दर्ज मुकदमे की विवेचना पूरी कर गोसाईंगंज थाने के मधुवन निवासी शिवभोले निषाद, रुदई निषाद व एक किशोर आरोपी के खिलाफ चार्जशीट कोर्ट में दाखिल की थी। मुकदमे के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से पैरवी कर रहे एडीजीसी क्रिमिनल रामअचल मिश्र ने घटना को साबित करने के लिए सात गवाहों को कोर्ट में पेश किया।
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बुधवार को एडीजे अभय श्रीवास्तव ने साक्ष्यों का अवलोकन करने के बाद आरोपी शिवभोले निषाद व रुदई निषाद को आजीवन कारावास और एक लाख 10 हजार रुपये जुर्माना की सजा सुनाकर जेल भेजने का आदेश दिया। मामले में आरोपित एक किशोर आरोपी का विचारण किशोर न्याय बोर्ड में चल रहा है।
उधार के 20 हजार मांगने पर गई थी जान
मृतक दयाशंकर ने हत्या आरोपी शिव भोले निषाद को नाव बनवाने के लिए 20 हजार रुपये उधार दिया था। सरकारी वकील रामअचल मिश्र बताते हैं कि दयाशंकर अपना 20 हजार रुपये आरोपी शिव भोले निषाद से मांग रहा था, इससे शिव भोले निषाद परेशान था।
उसने अन्य अभियुक्तों के साथ मिलकर दयाशंकर की हत्या की योजना बनाई थी। घटना के दिन शिव भोले ने दयाशंकर को अपने घर बुलाकर अन्य अभियुक्तों के साथ मिलकर हत्या कर दी और सबूत मिटाने के लिए लाश गोमती नदी में फेंक दी थी।
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