बीते फरवरी माह में हुई ओलावृष्टि से नष्ट हुई फसलों की क्षतिपूर्ति के लिए शासन की ओर से किसानों को मुआवजे का चेक वितरित किया जा रहा है। सप्ताह भर पहले ब्लॉक भेटुआ के गांव कोरारी लच्छनशाह में चेक वितरित करने गए लेखपाल को ग्रामीणों ने बंधक बना लिया था। ग्रामीणों का आरोप था कि लेखपाल ने गांव के भूमिहीनों और मृतकों के नाम चेक बांटा है। ग्रामीणों की शिकायत के बाद शुरू हुई जांच में इसकी पुष्टि होने पर एसडीएम ने मंगलवार को लेखपाल को निलंबित कर दिया। एसडीएम की कार्रवाई से लेखपालों में हड़कंप मचा है।
फरवरी व मार्च माह में हुई ओला और अतिवृष्टि से किसानों की भारी मात्रा में फसलें नष्ट हो गई थीं। फसल नष्ट होने के बाद शासन ने जिला प्रशासन से नुकसान का आकलन कराकर प्रभावित किसानों को मुआवजा देने का निर्णय लिया था। शुरुआती दौर से ही मुआवजे के चेक वितरण में हलका लेखपालों की ओर से अनियमितता बरतने का आरोप लगने लगा था। सप्ताह भर पूर्व ब्लॉक भेटुआ की ग्राम पंचायत कोरारी लच्छनशाह के लेखपाल रमेशचंद्र शुक्ल को ग्रामीणों ने उस समय बंधक बना लिया जब वे गांव में मुआवजे का चेक बांटने गए थे।
ग्रामीणों का आरोप था कि लेखपाल भूमिहीनों और मृतकों के नाम चेक जारी कर रहा है। ग्रामीणों के बवाल के बाद एसडीएम सुभाषचंद्र प्रजापति ने पूरे प्रकरण की जांच तहसीलदार को सौंपते हुए रिपोर्ट मांगी थी। तहसीदार की रिपोर्ट में पुष्टि हुई कि लेखपाल ने गांव की भूमिहीन सुमित्रा देवी को तीन हजार तथा मायावती को 2700 का तथा दिवंगत आशा सिंह के नाम भी चेक बनाया था। तहसीदार की रिपोर्ट पर मंगलवार को एसडीएम ने लेखपाल को तत्काल प्रभाव से निलंबित करते हुए उसे रजिस्ट्रार कार्यालय से संबद्ध कर दिया।