सुल्तानपुर। कई किलोमीटर के लंबे-चौड़े इलाके में अपराध नियंत्रण की कमान एक-दो कमरों के भवन के जिम्मे है, जिसे नाम तो पुलिस चौकी का दिया गया है, किंतु यहां पुलिस कभी नजर नहीं आती है। यहां दरवाजे पर ताला लटका रहता है। ऐसे में फरियादियों को भागकर 12 किलोमीटर दूर बंधुआकलां थाने ही जाना पड़ता है।
बंधुआकलां थाने के तहत आने वाली इस पुलिस चौकी का नाम है खोखीपुर। दो साल पहले बनाई गई इस पुलिस चौकी में फिलहाल चौकी इंचार्ज, दो दारोगा समेत सात पुलिसकर्मियोें का स्टाफ तैनात है। किंतु यहां ढंग से पीने के पानी तक का इंतजाम नहीं है। ऐसे में यहां कोई रहना नहीं चाहता। पूरा स्टाफ थाने पर ही मिलता है। ऐसे में लाखों रुपये खर्च कर चौकी स्थापना का लक्ष्य पूरी तरह से फेल है।
दो साल में यहां जरूरी इंतजाम करने में विफल अफसर सीधे इसे स्वीकारने की बजाय दावा करते हैं कि दिन में यह पुलिस चौकी खुलती है। यहां स्टाफ मौजूद रहता है और बाकायदा चौकी का निरीक्षण भी होता है। किंतु यह जवाब अगर सच्चा होता तो ग्रामीण अपनी फरियाद लेकर थाने क्यों भागते? इस बारे में सीओ सिटी शिवम मिश्रा कहते हैं कि उन्होंने खुद इस चौकी का निरीक्षण किया है। दिन में यहां स्टाफ रहता है। हालांकि मूलभूत सुविधाएं यहां नहीं हैं, इसलिए रात में कोई नहीं रहता। हालांकि वे कहते हैं कि मूलभूत सुविधाओं के लिए प्रयास किया जा रहा है। जल्द ही वहां सारे इंतजाम हो जाएंगे।
पुलिस चौकी पर मूलभूत सुविधाएं नहीं
खोखीपुर पुलिस चौकी पर कागजों में एक चौकी इंचार्ज, एक दारोगा, हेड कांस्टेबल और महिला कांस्टेबल समेत सात स्टाफ की तैनाती है। पुलिस अफसरों ने चौकी तो बनवा दी, लेकिन यहां पेयजल से लेकर आवास और शौचालय तक का इंतजाम नहीं करवाया। चौकी के आसपास चाय-पान की दुकानें तक नहीं हैं। यही वजह है कि यहां कोई पुलिसकर्मी रात तो दूर दिन में भी नजर नहीं आता है।