गौरीगंज। ग्रामीण क्षेत्रों में छुट्टा गोवंश की समस्या से परेशान शासन ने जिले में बंद पड़े सभी कांजी हाउस को दोबारा संचालित करने की योजना बनाई है। इसके लिए विशेष सचिव ने डीएम को पत्र भेजकर जिला पंचायतों के माध्यम से कांजी हाउस संचालित करने का निर्देश दिया है।
विशेष सचिव ने कांजी हाउस की मरम्मत, पानी, पेयजल व चारा की व्यवस्था जिला पंचायतों को आवंटित राज्य वित्त आयोग की धनराशि से करने को कहा है।
छुट्टा गोवंश से हो रही ग्रामीणों को परेशानी व फसलों के नुकसान को देखते हुए प्रदेश सरकार ने जिला पंचायतों के नियंत्रणाधीन रहे कांजी हाउस को पुन: संचालित करने की योजना बनाई है।
इसके लिए विशेष सचिव ने डीएम को पत्र भेजकर कांजी हाउस को संचालित करने का निर्देश देते हुए राज्य वित्त आयोग की धनराशि से नियमानुसार खर्च करने को कहा है।
विशेष सचिव का पत्र मिलने के बाद डीएम डॉ. राम मनोहर मिश्र ने अपर मुख्य अधिकारी जिला पंचायत को पत्र भेजकर बंद पड़े सभी कांजी हाउस को सुदृढ़ करने व नियमानुसार संचालन की व्यवस्था सुनिश्चित करने का आदेश दिया है।
डीएम ने पत्र में कांजी हाउस संचालन के लिए पशुओं को रखने की व्यवस्था के साथ ही पेयजल, चरही, भूसा व चोकर समेत अन्य की व्यवस्था जिला पंचायत को आवंटित राज्य वित्त आयोग की धनराशि से करने को कहा है।
डीएम ने कांजी हाउसों का संचालन नहीं होने तथा आवंटित धनराशि का नियमानुसार उपभोग नहीं करने तथा क्षेत्र में छुट्टा गोवंश मिलने पर कार्रवाई की चेतावनी दी है।
त्रिलोकपुर, बाजार शुकुल, सत्थिन, मोहनगंज, अमेठी, संग्रामपुर, टीकरमाफी, बहुआ, मुसाफिरखाना, जायस ग्रामीण और जनपद की सीमा पर इसौली परिक्षेत्र में कांजी हाउस बने थे। कांजी हाउसों में सत्थिन, मोहनगंज और त्रिलोकपुर का मरम्मत कर गो सरंक्षण केंद्र के रूप में संचालन शुरू हो चुका है।