सुल्तानपुर। जिले में एक बार फिर पुलिस की किरकिरी हुई है। करीब 13 माह पूर्व मामूली विवाद में हुई बुजुर्ग की हत्या के मामले में विसरा नष्ट होने के बावजूद विवेचक ने कोर्ट में चार्जशीट दाखिल कर दी।
डीआईजी के आदेश पर अमेठी के एएसपी ने जांच करके तत्कालीन कोतवाल समेत चार पुलिस कर्मियों को दोषी करार दिया है। मामले को लेकर पुलिस विभाग में हड़कंप मचा है। मामला चांदा कोतवाली के गोपीनाथपुर गांव से जुड़ा है।
चांदा कोतवाली क्षेत्र के गोपीनाथपुर गांव निवासी बसंत अग्रहरि के बेटे अभिषेक की 29 मई 2018 को गांव के ही केतन शर्मा ने पिटाई कर दी थी।
मारपीट की शिकायत करने के लिए अभिषेक के बाबा अशर्फीलाल केतन शर्मा के घर गए थे जहां पर केतन शर्मा ने भाई के साथ मिलकर अशर्फीलाल के साथ मारपीट। इससे अशर्फीलाल की मौत हो गई थी।
चांदा कोतवाली पुलिस ने घटना का मुकदमा दर्ज करने के बाद शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेजा था। मौत का कारण स्पष्ट न होने पर विसरा जांच के लिए सुरक्षित कर लिया गया था।
जांच अधिकारी ने सुरक्षित विसरा को समय से विधि विज्ञान प्रयोगशाला नहीं भेजा। इस दौरान विसरा ही नष्ट हो गया। घटना की विवेचना कर रहे एसआई शशिकांत पटेल ने धारा 304 घटा कर आरोप पत्र कोर्ट में पेश कर दिया था।
बसंत अग्रहरि ने पूरे मामले की शिकायत पुलिस अधिकारियों के साथ ही हाईकोर्ट में की थी। मामले को गंभीरता से लेते हुए डीआईजी अयोध्या ने एएसपी अमेठी को सौपी थीं।
एएसपी अमेठी की जांच रिपोर्ट के मुताबिक पूर्व विवेचक शशिकांत पटेल ने मृतक अशर्फीलाल का बिना विसरा परीक्षण रिपोर्ट प्राप्त किए ही अभियोग का निस्तारण कर दिया।
साथ ही बिना प्रमाणित साक्ष्य के विसरा नष्ट हो जाने का उल्लेख अभियोग दैनिकी में करते हुए कोर्ट उच्चाधिकारियों को रिपोर्ट भेज दी गई, जिसके लिए दरोगा शशिकांत पटेल को दोषी माना गया है।
पिछले साल 24 सितंबर को हेड मुहर्रिर रमापति यादव ने बिना पुष्टिकारक प्रमाण का उल्लेख किए ही रोजनामचा आम में विसरा नष्ट होने का जिक्र कर दिया है, जिसके लिए एएसपी ने उन्हें भी दोषी माना है।
मृतक का विसरा कांस्टेबल इस्लामुद्दीन की ओर से विधि विज्ञान प्रयोगशाला वाराणसी में दाखिल करने ले जाया गया। पर, संबंधित कांस्टेबल ने वाराणसी जाने संबंधित अपनी रवानगी तक चांदा कोतवाली के अभिलेख में नहीं दर्ज कराई गई। न ही वापसी का जिक्र ही कोतवाली के रिकॉर्ड में है।
इसके लिए कांस्टेबल इस्लामुद्दीन को दोषी माना गया है। चांदा कोतवाली के तत्कालीन प्रभारी निरीक्षक संजय सिंह ने अभियोग के निस्तारण में कोई दिशा-निर्देश तक नहीं दिया, सिर्फ जांच अधिकारी शशि कांत पटेल की अभियोग दैनिकियों का अग्रसारण कर दिया गया।
एएसपी के मुताबिक यह तत्कालीन एसएचओ के शिथिल पर्यवेक्षण का द्योतक है। इसके लिए तत्कालीन प्रभारी निरीक्षक संजय सिंह (अब नगर कोतवाल) को दोषी माना गया है।