सुल्तानपुर। पहले नैतिकता का एक आदर्श होता था। वर्तमान समय में नैतिकता का तेजी से पतन हुआ है। इससे मूल्यों का क्षरण हो रहा है। ऐसी परिस्थिति में अधिवक्ताओं को चाहिए कि वे नैतिकता का उच्च मानदंड स्थापित करें। ये बातें जिला एवं सत्र न्यायाधीश संतोष राय ने कहीं। वे बृहस्पतिवार को दीवानी न्यायालय परिसर में पूर्व राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद की जयंती पर आयोजित अधिवक्ता दिवस कार्यक्रम को बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रहे थे।
जिला एवं सत्र न्यायाधीश संतोष राय ने कहा कि न्यायिक अधिकारियों व वकीलों को मिनिमम कंटेंट ऑफ मॉरलिटी (नैतिकता की न्यूनतम सामग्री) का पालन करना चाहिए। कानून के अलावा हम परंपराओं से भी बंधे हैं। वकालत पेशे का गौरवशाली इतिहास रहा है। इसमें आ रही गिरावट रोकने की जरूरत है।
अधिवक्ता समाज को दिशा देने का कार्य करते हैं। डॉ. राजेंद्र प्रसाद देश की महान शख्सियत थे। बार एसोसिएशन अध्यक्ष नागेंद्र सिंह ने कहा कि न्यायिक व्यवस्था के सुचारु संचालन में पूरा सहयोग किया जाएगा। जिले के प्रत्येक अधिवक्ता को वाजिब सम्मान दिलाना ही मकसद है। वकीलों के सम्मान के लिए सदैव लड़ाई लड़ी जाएगी।
बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष राम विशाल तिवारी, पूर्व सचिव सूर्यप्रकाश पांडेय, अनिल शुक्ल समेत कई अन्य वकीलों ने डॉ. राजेंद्र प्रसाद के जीवन पर प्रकाश डालते हुए उनके कई संस्मरण सुनाए। कार्यक्रम को एडीजे राकेश यादव, पूर्व अध्यक्ष शिवमंगल शुक्ल, अच्छेराम यादव, संजय सिंह, श्रीराम सिंह समेत कई लोगों से संबोधित किया।
इस दौरान कई वकीलों को सम्मानित किया गया। इस मौके पर देवी प्रसाद सिंह, राकेश श्रीवास्तव, इंद्र कुमार शुक्ल, तारकेश्वर सिंह, रमेश सिंह, रामकिशोर पांडेय, संदीप सिंह, योगेंद्र प्रताप सिंह, मदन सिंह, सुधांशु श्रीवास्तव, सुभाष चंद्र तिवारी, मानवेंद्र शुक्ल, शिव पाठक, गोरखनाथ शुक्ल, तेज बहादुर सिंह समेत कई अधिवक्ता मौजूद रहे।