लंभुआ। क्षेत्र के सैतापुर सराय गांव स्थित सिद्घ जनवारी नाथ धाम पर जल चढ़ाने से लोगों की मनोकामनाएं पूरी होती हैं। यहां सावन मास में भगवान शिव की भक्तों पर कृपा बरसती है। महाशिवरात्रि को यहां कई जिलों के श्रद्घालु जलाभिषेक को उमड़ते हैं। यह सिद्घ धाम तहसील मुख्यालय से करीब तीन किलोमीटर दूर गरएं मार्ग पर सैतापुर सराय गांव में स्थित है। यहां टैक्सी, ऑटो रिक्शा व निजी साधनों से आसानी से पहुंचा जा सकता है।
धाम स्थापना के नहीं साक्ष्य
सिद्घ पीठ जनवारी नाथ धाम पर मंदिर की छत नहीं है। जिस किसी ने भी यहां मंदिर की छत बनाना चाहा उसके साथ अनिष्ट हो गया। धाम की स्थापना के साक्ष्य नहीं मिलते हैं। मान्यता है कि सैकड़ों वर्ष पुराने इस धाम में शिवलिंग स्वत: प्रस्फुटित हुआ था। बुजुर्ग बताते हैं कि कभी यहां घना जंगल हुआ करता था। मवेशी चराने निकले कुछ चरवाहे यहां मिले पत्थर के ऊपर रस्सी बनाते थे। उसी समय गांव के काली सिंह को स्वप्न आया कि पत्थर स्वयं शिव है। उन्होंने इस स्थान पर अरघा बनवाकर पूजन-अर्चन शुरू कर दिया। धीरे-धीरे यह स्थल भगवान शंकर के सिद्घ स्थल के रूप में मशहूर हो गया।
जन सहयोग से होती मंदिर की देखभाल
मंदिर के प्रबंधन के लिए न तो कोई समिति है, न ही ट्रस्ट। फिर भी इलाके के लोग स्वप्रेरणा से सावन, अधिकमास (मलमास) तथा महाशिवरात्रि पर्व को यादगार बनाने में कोई कसर बाकी नहीं रखते। मंदिर की साफ-सफाई से लेकर प्रसाद वितरण सरीखे कार्यक्रम चलते रहते हैं। अन्य दिनों में भी सोमवार व शनिवार को मेले जैसा जमघट लगा रहता है, जिसमें महिलाओं की संख्या अधिक रहती है। करीब तीन बीघे में फैले मंदिर परिसर के लिए लोगों ने अपनी जमीन दान दी है। मंदिर की देखभाल धोपाप के गोसाईं करते हैं।