सुल्तानपुर। रस्साकशी भरे इस चुनाव में भाजपा प्रत्याशी की सारी मेहनत को नजरअंदाज करते हुए जनता ने समाजवादी पार्टी में भरोसा जताया है। गोरखपुर के रहने वाले रामभुआल निषाद नए सांसद चुन लिए गए हैं। पार्टी को जिले की पांच में से चार विधानसभा सीटों पर बढ़त मिली है किंतु यह जनमत वर्ष 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव तक कायम रख पाना पार्टी के लिए बड़ी चुनौती है।
पहली बार सुल्तानपुर से लोकसभा चुनाव जीतने वाली सपा के लिए यह चुनौती इसलिए भी बड़ी है क्योंकि नए सांसद गोरखपुर के रहने वाले हैं। ऐसे में वे सुल्तानपुर को कितना समय दे पाएंगे, इस पर संदेह जताए जा रहे हैं।
उनसे पहले मेनका गांधी भले ही दिल्ली में रहती हों लेकिन हर पखवाड़े तीन दिन वे सुल्तानपुर की जनता के लिए समर्पित रहती थीं। ऐसे में नए सांसद से भी सुल्तानपुर को कम से कम इतनी अपेक्षा जरूर होगी।
इसके अलावा सुल्तानपुर में प्रत्याशी बदलने को लेकर जो रस्साकशी यहां के नेताओं में चली, वह चुनाव हराने में भी सक्षम थी, यदि जिले में सपा-कांग्रेस गठबंधन के लिए अंडरकरंट न चल रहा होता। भीम निषाद को लेकर पार्टी दो खेमों में बंट गई थी। गनीमत यही रही कि भीम निषाद को पार्टी ने अंतत: प्रचार के लिए मना लिया था।
पार्टी के भीतर उस दौरान उभरी खटास अभी भी पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। यदि यह माहौल आगे भी कायम रहा तो पार्टी को विधानसभा चुनाव में मुश्किलें जरूर झेलनी पड़ सकती हैं। इस बारे में जिलाध्यक्ष रघुवीर यादव कहते हैं कि सांसद यहां उपलब्ध रहेंगे। इसकी पूरी उम्मीद है। इसके अलावा संगठन को अभी बूथ स्तर तक और मजबूत किया जाएगा।