किसान अधिक पैदावार के चक्कर में धान की खेती करने के लिए हाईब्रीड बीज का इस्तेमाल करते हैं। इससे पैदावार तो बढ़ जाती है पर बाद में धान को बेचने में उन्हें दिक्कतें उठानी पड़ती हैं।
धान की खरीद जिला खाद्य एवं विपणन एजेंसी करती है और हाईब्रीड धान उसके मानकों पर खरा नहीं उतरता है। इस वजह से किसानों को गाढ़ी कमाई से तैयार हाईब्रीड धान बेचने के लिए भटकना पड़ता है। किसान अपना हाईब्रीड धान निजी दुकानदारों को औने-पौने दामों में बेचने को मजबूर होते हैं।
इस वर्ष किसानों को हाईब्रीड धान के अलावा अन्य धान के बीजों पर अनुदान नहीं मिल रहा है। शासन ने इस वर्ष किसानों को बीज की खरीदारी पर मिलने वाली सब्सिडी के नियमों में परिवर्तन कर दिया है। पहले किसानों को राजकीय बीज भंडारों से अनुदान पर बीज मिलता था।
जबकि इस वर्ष नियमों में हुए फेरबदल के तहत ब्लॉक मुख्यालयों पर निजी कंपनियों की ओर से स्टॉल लगाए गए हैं। किसान स्टॉलों से बीज की खरीदारी कर रसीद, बैंक पासबुक की छाया प्रति व अन्य अभिलेख कृषि विभाग में जमा करना होता है।
विभाग की ओर से किसानों के बैंक खाते में आरटीजीएस के तहत अनुदान की राशि भेजी जाएगी। धनपतगंज ब्लॉक के सिटकहिया गांव निवासी अशोक तिवारी कहते हैं कि हाईब्रीड धान की सरकारी खरीद नहीं होने से किसानों को परेशानी होती है।
कुड़वार ब्लॉक के मंगापुर निवासी विनोद सिंह कहते हैं कि सरकार हाईब्रीड धान की बिक्री तो करवा रही है, लेकिन किसानों के हाईब्रीड धान की खरीद सरकारी एजेंसियां नहीं करती हैं। ग्रेंट कुड़वार निवासी शिवशंकर सिंह व हरखपुर निवासी राम स्वारथ यादव का कहना है कि सरकार को पहले इस बात की योजना बनानी चाहिए कि हाईब्रीड धान की सरकारी खरीद हो।
जिला कृषि अधिकारी संदीप कुमार ने बताया कि किसानों को सभी प्रजाति के हाईब्रीड धान के बीज पर 130 रुपये/किग्रा. की दर से आरटीजीएस के माध्यम से अनुदान की राशि दी जाएगी। हाईब्रीड के अलावा अन्य धान के बीज पर सब्सिडी नहीं मिलेगी।
अपर जिला कृषि अधिकारी हरिश्चंद्र मिश्र ने बताया कि किसानों को खेत की तैयारी करने के बाद धान की नर्सरी डालनी चाहिए। जितने खेत में धान की रोपाई करनी हो, उसके 15वें भाग के हिस्से में नर्सरी डालना चाहिए। नर्सरी में सिंचाई सदैव शाम के समय करना फायदेमंद होता है। खेत में नमी रखना जरूरी होता है। नर्सरी में पानी का भराव नहीं होना चाहिए।