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बगैर अभिलेखों के सत्यापन के वर्षों से नौकरी कर रहे सैकड़ों शिक्षक

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सुल्तानपुर। आए दिन शिक्षक भर्ती में कागजातों में हेर-फेर कर नौकरी हासिल करने का मामला सुर्खियों में रहता है। बावजूद इसके जिले में सैकड़ों शिक्षक ऐसे हैं, जिनके पूरे शैक्षिक अभिलेखों का सालों बीत जाने पर भी सत्यापन तक नहीं हो सका है। शिक्षक बेरोकटोक वेतन आहरित कर रहे हैं।
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जिले में 72,825 शिक्षक भर्ती प्रक्रिया, 29,334 गणित-विज्ञान शिक्षक भर्ती प्रक्रिया, 15,000 सहायक अध्यापक भर्ती प्रक्रिया, 16,448 शिक्षक भर्ती प्रक्रिया, 12,460 शिक्षक भर्ती प्रक्रिया, 3500 उर्दू शिक्षक भर्ती प्रक्रिया समेत कई भर्तियों में लगभग 2700 शिक्षकों की नियुक्तियां हुई हैं।
इन भर्ती प्रक्रियाओं के तहत नियुक्त शिक्षकों में से अधिकतर के पूरे शैक्षिक अभिलेख सत्यापित नहीं हो पाए हैं। बिना शैक्षिक अभिलेखों के सत्यापन कराए ही शिक्षकों को बेरोकटोक वेतन दिया जा रहा है। ऐसे में सवाल यह उठता है कि अगर इन भर्ती प्रक्रियाओं में किसी शिक्षक की डिग्री फर्जी निकली तो इसकी जिम्मेदारी किसकी होगी? सत्यापन की लचर प्रक्रिया की वजह से सैकड़ों शिक्षक बगैर अभिलेखों का सत्यापन कराए तनख्वाह ले रहे हैं।
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विभिन्न भर्ती प्रक्रियाओं में नियुक्त शिक्षकों को शासन के निर्देश पर दो सत्यापन पर वेतन देने का निर्देश जारी हुआ था। हाईस्कूल, इंटरमीडिएट, स्नातक, बीएड/बीटीसी में से किन्हीं दो शैक्षिक अभिलेखों का सत्यापन हो जाने पर वेतन रिलीज करने का आदेश शासन ने दिया था। इसी आधार पर शिक्षकों को वेतन आदेश जारी किया गया है। वेतन मिलते रहने की वजह से शिक्षक भी अपने कागजातों के सत्यापन को लेकर बेपरवाह हैं।
हाईस्कूल एवं इंटरमीडिएट का वर्ष 2004-05 के बाद उत्तीर्ण अभ्यर्थियों का ऑनलाइन सत्यापन किए जाने की व्यवस्था है। उसके पहले पासआउट अभ्यर्थियों का मैनुअल सत्यापन बोर्ड को भेजा जाता है। कई बोर्ड और यूनिवर्सिटी सत्यापन के लिए शुल्क लेते हैं।
बेसिक शिक्षा विभाग के पास सत्यापन शुल्क का कोई मद नहीं होने की वजह से भी सत्यापन प्रक्रिया की प्रगति धीमी है। सीबीएसई बोर्ड, डॉ. भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय आगरा, इलाहाबाद विश्वविद्यालय, जम्मू यूनिवर्सिटी समेत कई बाहरी प्रदेशों के विश्वविद्यालय सत्यापन का शुल्क चार्ज करते हैं।
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