जयसिंहपुर (सुलतानपुर)। निशुल्क और अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 के तहत 11 छात्रों के प्रवेश में देरी के को हाईकोर्ट इलाहाबाद की लखनऊ बेंच ने गंभीरता से लिया है। इस मामले में बीएसए को नोटिस जारी कर चार दिन में जवाब मांगा है।
मोहम्मद सरफराज और अन्य 10 छात्रों की ओर से दाखिल याचिका पर सुनवाई करते हुए अदालत ने चेतावनी दी कि यदि समय पर उचित कदम नहीं उठाया गया तो मामले की सुनवाई मेरिट के आधार पर होगी।
याचिकाकर्ताओं का पक्ष रखते हुए अधिवक्ता ने बताया कि शिक्षा विभाग के अधिकारियों की ओर से प्रवेश प्रक्रिया में लापरवाही और नियमों का उल्लंघन किया गया है। इससे पहले रब्बन हासिमी ने अपने अधिवक्ता की ओर से बेसिक शिक्षा अधिकारी सुल्तानपुर को विधिक नोटिस भेजा था।
नोटिस में कहा गया कि अधिनियम के तहत आवंटित छात्रों का प्रवेश अब तक सुनिश्चित नहीं किया गया है, जिससे उनके शैक्षिक अधिकारों का हनन हो रहा है। नोटिस में उल्लेख किया गया कि शिक्षा महानिदेशक के आदेशानुसार प्रवेश में अनावश्यक दस्तावेजों की मांग और देरी अवैध है। राज्य सरकार की ओर से अधिवक्ता ने अदालत में चार दिन का समय मांगा, जिसे अदालत ने 28 नवंबर 2024 तक का अंतिम अवसर देते हुए स्वीकार किया। हाईकोर्ट के सख्त रुख से अब प्रशासन पर शीघ्र कार्रवाई करने का दबाव बढ़ गया है।