सुल्तानपुर के करौंदी कला थाने में याची की तैनाती थी। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया था कि उसकी रिहाई की अर्जी पर रिपोर्ट देने के लिए 10 हजार रुपये की रिश्वत की मांग की थी। भ्रष्टाचार निरोधक टीम अयोध्या की ट्रैप टीम ने कथित तौर पर रंगे हाथ पकड़ा गया और रिश्वत की राशि भी बरामद हुई। इस मामले में याची एसआई ने जमानत के लिए हाईकोर्ट में अर्जी दायर की।
याची के अधिवक्ता उदय भान सिंह ने दलील दी कि आरोप झूठे हैं और ट्रैप की प्रक्रिया में गंभीर कमियां हैं। जिस स्थान पर रिश्वत लेने का दावा किया गया था, वहां याची और शिकायतकर्ता के हाथ नहीं धोए गए थे। बरामद पैसे को न तो मौके पर सीलबंद किया गया और न ही बरामदगी मेमो घटनास्थल पर तैयार किया गया। सभी जरूरी औपचारिकताएं ट्रैप के तुरंत बाद पुलिस टीम के याची और शिकायतकर्ता के साथ पुलिस स्टेशन की ओर जाने के दौरान रास्ते में पूरी की गईं। इससे पूरी ट्रैप कार्रवाई पर संदेह पैदा कर दिया। ब्यूरो