अमेठी के सीएचसी अधीक्षक की हत्या के आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग को लेकर राज्य कर्मचारियों की दो दिवसीय कलमबंद हड़ताल मंगलवार से शुरू हुई। हड़ताल के पहले ही दिन जहां प्रशासनिक काम-काज ठप हो गया, वहीं संयुक्त जिला अस्पताल सहित जिले की सभी सीएचसी व पीएचसी पर इलाज के लिए पहुंचे मरीजों को बैरंग लौटना पड़ा। हड़ताल से आम लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ा।
अमेठी के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र प्रभारी डॉ. पीके सिंह को बीते 11 दिसंबर की शाम प्रतापगढ़ की चिलबिला रेलवे क्रॉसिंग के पास गोली मार दी गई थी। घटना के वक्त वे जौनपुर स्थित अपने पैतृक गांव से अमेठी लौट रहे थे। चिकित्सक की इलाज के दौरान 19 दिसंबर को गुडग़ांव के मेदांता अस्पताल में मौत हो गई थी। चिकित्सक की मौत के बाद भड़के राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद ने हत्या आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग को लेकर प्रदर्शन करने के साथ ही 22 व 23 दिसंबर को कलमबंद हड़ताल करने की घोषणा की थी। मंगलवार को हड़ताल के पहले ही दिन पूरे जिले की प्रशासनिक व्यवस्था चरमराई नजर आई।
शहर से सटे असैदापुर गांव स्थित संयुक्त जिला चिकित्सालय में पूरी तरह काम-काज ठप रहा। इमरजेंसी सेवाओं को छोड़कर अन्य मरीजों को अस्पताल के बाहर से वापस कर दिया गया। चिकित्सकों के साथ ही स्वास्थ्य कर्मियों ने अस्पताल के मुख्य द्वार को बंद कर प्रदर्शन करते हुए हत्या आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग की। हड़ताल की वजह से स्वास्थ्य विभाग के अलावा कलेक्ट्रेट के संयुक्त व अन्य कार्यालय, विकास भवन सहित तकरीबन सभी सरकारी विभागों के दफ्तरों में कोई काम नहीं हुआ।
परिषद अध्यक्ष सुभाष पांडेय और मंत्री अजय सिंह ने बताया कि कर्मचारियों की कलमबंद हड़ताल पूरी तरह सफल रही। हड़ताल बुधवार को भी जारी रहेगी। इसके बाद भी चिकित्सक के हत्या आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं हुई तो वे बड़े आंदोलन को विवश होंगे।