सुल्तानपुर। शहर के नालों से निकलने वाला दूषित जल अब सीधे आदि गंगा गोमती में नहीं जाएगा। नमामि गंगे प्रोजेक्ट के अंतर्गत शहर के तीन बड़े नालों से बहने वाले पानी को शोधित करने के लिए पलहीपुर गांव में करीब पांच एमएलडी (मिलियंस लीटर पर डे) क्षमता के एसटीपी प्लांट का निर्माण कार्य शुरू कर दिया गया है।
गोमती प्रदूषण नियंत्रण इकाई जल निगम प्रथम की ओर से बनाए जाने वाले एसटीपी प्लांट के निर्माण में करीब 36 करोड़ रुपये का खर्च आएगा। एसटीपी प्लांट का निर्माण पूरा होने के बाद गोमती नदी में स्वच्छ पानी जाएगा।
वर्तमान समय में शहर के गली-मोहल्लों से निकलने वाला दूषित जल नालियों के जरिए छह बड़े नालों से मिलता है। इनमें विनोबापुरी, सीताकुंड, बढ़ैयावीर, गभड़िया, करौंदिया प्रथम व करौंदिया द्वितीय नाला शामिल है।
नालों से निकलने वाला दूषित पानी सीधे गोमती नदी को प्रदूषित न कर सके इसके लिए शहर के विनोबापुरी, सीताकुंड व बढ़ैयावीर मोहल्ले में जल निगम की ओर से स्थापित एसटीपी प्लांट (सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट) का संचालन हो रहा है।
एसटीपी के जरिए तीनों नालों से निकलने वाले दूषित पानी का शोधन करने के बाद गोमती नदी में प्रवाहित किया जाता है। शेष बचे गभड़िया, करौंदिया प्रथम व करौंदिया द्वितीय नाले का पानी शहर के पश्चिमी छोर से गोमती नदी में जाता है।
इस पानी के शोधन के लिए जल निगम की स्थानीय इकाई ने शासन को प्रस्ताव भेजा था। शासन की ओर से नमामि गंगे प्रोजेक्ट के अंतर्गत गोमती प्रदूषण नियंत्रण इकाई प्रथम जल निगम लखनऊ को एसटीपी प्लांट के निर्माण की जिम्मेदारी दी गई है।
जल निगम की गोमती प्रदूषण नियंत्रण इकाई प्रथम की ओर से शहर से सटे पलहीपुर गांव स्थित करीब एक हेक्टेयर भूमि पर एसटीपी प्लांट का निर्माण कार्य शुरू करवा दिया गया है। अभी यहां पर फाउंडेशन समेत अन्य कार्य शुरू किए गए हैं।
कार्यदायी संस्था की ओर से यहां पर करीब पांच एमएलडी क्षमता का एसटीपी प्लांट बनाया जाएगा। गभड़िया, करौंदिया प्रथम व करौंदिया द्वितीय नाले से निकलने वाले दूषित जल को एक कॉमन चैंबर में इकट्ठा किया जाएगा। यहां से प्लांट के जरिए प्रतिदिन दूषित जल का निस्तारण कर शोधित पानी गोमती नदी में भेजा जाएगा। प्रोजेक्ट के पूरा होने में करीब 36 करोड़ रुपये का खर्च आएगा।