अपनी पहचान को लेकर जलीय पौधों से लड़ाई लड़ रही चंदौर से होकर बहने वाली पुरानी गोमती की धारा संक्रामक रोगों की वाहक बन गई है। नदी की जल धारा रुकने से तटवर्ती गांवों के किसानों की हजारों बीघा कृषि योग्य भूमि सीपेज के चलते बेकार हो गई है। गोमती का दूषित पानी मवेशियों के लिए जानलेवा बन गया है। इलाके में वायरल का फैलाव भी बढ़ता जा रहा है। पांच साल से नदी की सफाई को लेकर ग्रामीणों की सरकार से की जा रही मांग पर आज तक कोई कार्रवाई नहीं हो सकी है।
स्थानीय विकासखंड के उत्तरी-पूर्वी दिशा से कालांतर में बहने वाली गोमती नदी के 1955 में जल धारा बदलने के बाद खाझापुर से लेकर चंदौर के रास्ते नौगवांतीर तक करीब छह किलोमीटर की दूरी में नदी में जल प्रवाह बहुत कम हो गया है। समय बीतने के साथ इसमें जलकुंभी, सेवार, राणा जैसे जलीय पौधों का जमाव होता जा रहा है और नदी की धारा आज पूरी तरह ठप हो गई है। जल धारा का ठहराव होने से तटवर्ती किसानों के खेतों की तरफ गोमती का पानी बढ़ता गया और सीपेज का रूप ले लिया। इसके चलते खाझापुर, माधवपुर, तीरगांव, चंदौर, गयादत्त का पुरवा, अगई, सड़ांव, मुड़ुवा जैसे कई गांवों के किसानों की हजारों बीघा खेती योग्य जमीन सीपेज के प्रभाव में आकर बेकार हो गई है। ठहरा हुआ पानी धीरे-धीरेे विषाक्त होता गया।
यह विषाक्त पानी पीने से हर साल सैकड़ों मवेशी संक्रामक रोगों की चपेट में आकर दम तोड़ते हैं। वहीं दूसरी तरफ पानी की गंदगी से इलाके में वायरल बुखार का फैलाव लोगों की सेहत पर कहर बनकर टूट पड़ता है। बरसात आते ही यह समस्या विकराल हो जाती है। बीते पांच साल से नदी की सफाई को लेकर मांग की जा रही है। केंद्रीय जल संसाधन एवं नदी सफाई मंत्री उमा भारती, सांसद वरुण गांधी, सीएम सहित प्रधानमंत्री तक को लोगों ने इलाके की इस समस्या से अवगत कराया। बावजूद इसके आज तक कोई हल नहीं निकल सका है। नदी की सफाई को लेकर चंदौर के ब्रह्मचारी पीठ के अवधेश दास की अगुवाई में भेजे पत्र के जवाब में केंद्रीय मंत्री उमा भारती ने ग्रामीणों को लिखित रूप से आश्वस्त किया था कि जल्द ही नदी सफाई की योजना बनाई जाएगी।