सुल्तानपुर। रोडवेज बस में और खासकर सुल्तानपुर डिपो की बस में यदि आप यात्रा कर रहे हैं और अचानक सेहत खराब हो जाए तो भगवान ही मालिक हैं। आपको गाड़ी छोड़कर डॉक्टर ही तलाश करना पड़ेगा। क्योंकि डिपो की बसों में प्राथमिक उपचार और इलेक्ट्रॉल पाउडर तक उपलब्ध नहीं है। अफसर भले ही दावा करें कि सारे इंतजाम परिचालक के पास हैं, लेकिन ड्राइवर को भी इसकी खबर न हो यह संभव नहीं है।
शुक्रवार को सुबह 11:45 बजे बस स्टेशन पर सुल्तानपुर डिपो की बस (यूपी 42 एटी 5688) लखनऊ जाने के लिए खड़ी थी। बस के अंदर पड़ा अग्निशमन यंत्र चालक सीट के पीछे इधर-उधर लुढ़क रहा था। बस में फर्स्ट एड बाॅक्स कहीं नजर नहीं आ रहा था। चालक-परिचालक भी बस में नहीं थे, इसलिए और जानकारी नहीं मिल सकी। बगल में खड़ी दूसरी बस (यूपी 42 एटी 5579) में चालक-परिचालक यात्रियों का इंतजार कर रहे थे। इस बस में भी फर्स्ट एड बॉक्स नहीं था। चालक अनिल सिंह ने कहा कि इतनी पुरानी गाड़ी है। किसी तरह इसे चला रहा हूं। फर्स्ट एड बॉक्स के बारे में मुझे कोई जानकारी नहीं है।
दोपहर 12 बजे सुल्तानपुर डिपो की एक बस जौनपुर जाने के लिए खड़ी थी। चालक मनीष मिश्र को पता ही नहीं था कि फर्स्ट एड बॉक्स में क्या है। खोलकर देखा गया तो उसमें फर्स्ट एड किट थी, लेकिन इसमें भी इलेक्ट्रॉल पाउडर नहीं था। परिचालक संजय विश्वकर्मा ने कहा कि फर्स्ट एड बॉक्स में दवा कब से रखी है, उन्हें जानकारी नहीं है। सालभर से ज्यादा गया है, कभी इसकी जरूरत ही नहीं पड़ी।
हकीकत से जुदा है एआरएम का दावा
भले ही बसों में भौतिक रूप से प्राथमिक उपचार के लिए कुछ भी नजर न आता हो, लेकिन डिपो के सहायक क्षेत्रीय प्रबंधक नागेंद्र प्रसाद पांडेय कहते हैं कि सभी बसों में फर्स्ट एड बॉक्स है, लेकिन यहां से दवाएं अक्सर चोरी हो जाती हैं। इसलिए फर्स्ट एड किट परिचालक के पास रहती है। वे कहते हैं कि स्वास्थ्य विभाग की ओर से इलेक्ट्रॉल भी मिल रहा है जो बसों में दिया जा रहा है।