स्वतंत्रता संग्राम सेनानी के परिवारीजनों के समक्ष आजीविका का संकट खड़ा हो गया है। घर-बार छोड़कर गरीब परिवार दूसरे की शरण में जीवनयापन करने को मजबूर हैं। पीड़ित ने शासन-प्रशासन से सहायता दिलाए जाने की मांग की है।
अमेठी जनपद के सरवनपुर मोहल्ला गंगागंज निवासी मो. अशफाक ने उच्चाधिकारियों को पत्र भेजा है। कहा है कि उनके पिता मो. इसहाक स्वतंत्रता संग्राम सेनानी थे।
भारत को आजाद कराने में उन्होंने अंग्रेजी हुकूमत से लोहा लिया था। उनका कहना है कि पिछले 14 सालों से उन्होंने गरीबी के चलते अपना घर-बार छोड़ दिया है। तब से घर वालों के साथ वे सुल्तानपुर जनपद के सैफुल्लागंज में दूसरे के मकान में किराए पर रहकर किसी तरह से गुजर-बसर कर रहे हैं। परिस्थितियों से संघर्ष करते-करते परिवार का खर्च चलाना अब मुश्किल हो गया है।
पिता का साया सिर से उठने के बाद किसी भी तरह की सरकारी मदद नहीं मिल सकी। स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित पेंशन योजना का लाभ भी नहीं मिल सका है। अब परिवार में कुल आठ सदस्य हैं, जिनके भरण-पोषण का जिम्मा उन्हीं के कंधों पर है। इस बाबत उन्होंने कैबिनेट मंत्री गायत्री प्रसाद प्रजापति से भी गुहार लगाई लेकिन समस्या का हल नहीं निकला। उन्होंने उच्चाधिकारियों को पत्र भेजकर सरकारी सहायता दिलाने की मांग की है।