सुल्तानपुर। बेसिक शिक्षा महकमे में गड़बड़ियों का सिलसिला कम होने का नाम नहीं ले रहा है। एनपीआरसी वाले 114 विद्यालयों में शासन ने डेस्क-बेंच की व्यवस्था के लिए 91 लाख 20 हजार रुपये भेजे थे। जांच टीम ने जब विद्यालयों का दौरा किया तो आपूर्ति की गई डेस्क-बेंच की क्वालिटी घटिया पाई गई।
प्रदेश सरकार सभी बच्चों को विद्यालय के अध्ययन कक्ष में बैठने के लिए फर्नीचर उपलब्ध कराने की व्यवस्था में लगी है। पहले चरण में जिले के 114 न्याय पंचायत वाले विद्यालयों में फर्नीचर की व्यवस्था कराने का निर्देश दिया गया था। इसके लिए प्रति विद्यालय 80 हजार रुपये की दर से 91 लाख 20 हजार रुपये खातों में भेजे गए थे।
पैसा भेजते समय ही संबंधित विद्यालयों को निर्देश दिए गए थे कि प्लाई व एंगल की निर्धारित मोटाई के मुताबिक ही फर्नीचर मंगाए जाएं लेकिन पैसा आने के बाद अधिकतर अध्यापकों ने औने-पौने दाम में मनमाफिक फर्नीचर खरीद डाले।
मामले की जानकारी होने पर बीएसए संतोष सक्सेना ने जिला समन्वयक निर्माण आनंद शुक्ला, सहायक वित्त एवं लेखाधिकारी रामयश यादव व कूरेभार खंड शिक्षा अधिकारी की तीन सदस्यीय जांच कमेटी गठित कर जांच कराई तो कई स्कूलों में फर्नीचर मानक के विपरीत मिले।
टीम ने दूबेपुर विकासखंड क्षेत्र के उच्च प्राथमिक विद्यालय अमहट, कंपोजिट स्कूल लोहरामऊ द्वितीय तथा कुड़वार के कंपोजिट स्कूल रवनिया पश्चिम का निरीक्षण किया। तीनों विद्यालयों में फर्नीचर मानक के अनुरूप नहीं पाए गए। एंगल की मोटाई व प्लाई की साइज में कमी पाई गई।
समय से पूर्व बंद मिला विद्यालय
दूबेपुर विकासखंड क्षेत्र का उच्च प्राथमिक विद्यालय अहिमाने डेढ़ बजे ही बंद पाया गया। इसी विकासखंड क्षेत्र के प्राथमिक विद्यालय भादा में भी दोपहर 1:05 बजे ताला लटका हुआ मिला, जबकि विद्यालय बंद होने का समय दोपहर दो बजे है।
जारी होगा नोटिस
मानक के अनुरूप फर्नीचर नहीं क्रय किए जाने पर संबंधित विद्यालय के प्रधानाध्यापक को नोटिस जारी किया जाएगा। साथ ही आपूर्तिकर्ता फर्म को भी नोटिस जारी किया जाएगा। संतोषजनक जवाब न मिलने पर दोनों के विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी।
-रामयश यादव, सहायक वित्त एवं लेखाधिकारी एसएसए