सुल्तानपुर। पिछले दिनों हुई अति वृष्टि में 1400 मकान धराशाई हो गए हैं। यह आंकड़ा अभी बढ़ भी सकता है। जिला प्रशासन का कहना है कि अभी सर्वे चल रहा है। राजस्व कर्मी नुकसान का जायजा लेने में जुटे हैं।
जिला प्रशासन के मुताबिक मंगलवार को गोमती नदी का जलस्तर 83.090 मीटर से घटकर 83.020 मीटर पहुंच गया है। हालांकि गोमती नदी के किनारे के गांवों की दुश्वारियां पानी घटने के बाद भी बढ़ गई हैं।
खेतों में पानी भरा रहने से पशुओं के सामने चारे का संकट है। प्रभावित क्षेत्रों में दवाओं का छिड़काव नहीं होने से संक्रामक रोगों के फैलने की आशंका है।
मौसम के बदले रुख से पिछले दिनों बारिश होने से धनपतगंज ब्लॉक के कई गांव बाढ़ से प्रभावित हो गए थे। अमऊ, जासरपुर, सिंहोरिया, जज्जौर, माधवपुर, गयादत्त का पुरवा व बगियवा गांव में गोमती नदी का जलस्तर बढ़ने से लोगों को बाढ़ की आशंका सताने लगी थी।
इसमें सबसे खराब स्थित चारों तरफ से पानी से घिरे जासरपुर गांव की हो गई है। सोमवार व मंगलवार को बारिश नहीं होने से गोमती नदी का जलस्तर घटने लगा है। अभी भी पानी में डूबा रास्ता खाली नहीं होने से लोगों को आवाजाही में दिक्कतें हो रही है।
सबसे ज्यादा परेशानी पशुओं के सामने खड़ी हो गई है। इन गांवों में लगे हैंडपंपों से निकलने वाला बदबूदार पानी पूरी तरह से दूषित हो गया है। पानी दूषित होने से बीमारी की आशंका बनी हुई है।
जलभराव व फैले कीचड़ से उठ रही दुर्गंध को रोकने के लिए जिम्मेदार विभागों की ओर से अभी तक दवाओं का छिड़काव नहीं किया गया है। बारिश में लकड़ियों के भीग जाने से खाना बनाने के लिए लोग परेशान हैं। उधर, जिला प्रशासन बारिश से हुए नुकसान के आकलन में लगा है।
अब तक की सर्वे रिपोर्ट भारी नुकसान को तस्दीक कर रही है। अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व उमाकांत त्रिपाठी ने बताया कि अब तक की सर्वे रिपोर्ट में 1400 आंशिक व पूर्ण मकान गिरे हैं। इसमें रिहायशी छप्पर भी शामिल है। अभी सर्वे का कार्य चल रहा है।