सुल्तानपुर। डीएम के आदेश के बाद भी तीन शस्त्र न जमा करने के मामले में शनिवार को एमपी-एमएलए की विशेष अदालत के मजिस्ट्रेट योगेश कुमार यादव ने इसाैली के पूर्व विधायक चंद्रभद्र सिंह सोनू को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया। अभियोजन पक्ष अदालत में पूर्व विधायक के खिलाफ कोई ठाेस साक्ष्य पेश नहीं कर पाया। अदालत के फैसले से पूर्व विधायक को राहत मिल गई है।
बचाव पक्ष के अधिवक्ता रुद्र प्रताप सिंह मदन के मुताबिक 15 अगस्त 2012 को कूरेभार थाने में तत्कालीन एसओ रामबोध सिंह ने इसौली के पूर्व विधायक चंद्रभद्र सिंह सोनू के खिलाफ आर्म्स एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज कराया था। दो अगस्त 2007 को तत्कालीन डीएम संजय कुमार ने पूर्व विधायक की पिस्टल, रायफल व बंदूक का लाइसेंस निरस्त का उन्हें शस्त्र जमा करने का आदेश दिया था।
आरोप था कि करीब पांच वर्ष बीत जाने के बाद भी पूर्व विधायक ने शस्त्र जमा करने के आदेश का पालन नहीं किया था। मामले की विवेचना पूरी कर दरोगा शोभाराम मिश्र ने 18 अगस्त 2012 को पूर्व विधायक के खिलाफ आर्म्स एक्ट के तहत कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की थी। मुकदमे के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से मामले को साबित करने के लिए सात गवाह कोर्ट में पेश किए गए।
सुनवाई पूरी होने के बाद कोर्ट ने फैसले के लिए 16 सितंबर की तिथि नियत की थी। शनिवार दोपहर बाद पूर्व विधायक चंद्रभद्र सिंह सोनू अपने अधिवक्ता रुद्र प्रताप सिंह मदन व कई समर्थकों के साथ कोर्ट में पेश हुए। एमपी-एमएलए की विशेष अदालत के मजिस्ट्रेट योगेश कुमार यादव ने पूर्व विधायक को बरी करने का फैसला सुनाया। अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष पूर्व विधायक के खिलाफ कोई ठोस साक्ष्य पेश नहीं कर पाया है।