इंटरमीडिएट में 60 फीसदी से कम अंक पाने वाले छात्र-छात्राओं को अब स्नातक एवं अन्य व्यवसायिक कक्षाओं में प्रतिपूर्ति की धनराशि नहीं मिलेगी। बीते वर्ष शासन की ओर से लागू किया गया ये आदेश इस वर्ष भी प्रभावी रहेगा। खासकर प्राइवेट शिक्षण संस्थानों में व्यावसायिक शिक्षा ग्रहण कर रहे छात्रों पर ये आदेश सख्ती से लागू होगा। शासन के इस आदेश से कमजोर वर्ग के हजारों विद्यार्थियों की मंशा पर पानी फिर गया है।
स्नातक एवं उच्च कक्षाओं व समकक्ष अन्य व्यावसायिक शिक्षा ग्रहण कर रहे छात्रों के लिए अब प्रतिपूर्ति की रकम सरकार से पाना मुश्किल भरा हो गया है। स्नातक एवं अन्य उच्च व समकक्ष की व्यावसायिक कक्षाओं में प्रतिपूर्ति की रकम पाने के लिए छात्रों को इंटरमीडिएट में ही कड़ी मशक्कत करनी पड़ेगी। इंटरमीडिएट में यदि 60 फीसदी से कम अंक हुए तो संबंधित छात्र को फीस प्रतिपूर्ति की रकम नहीं मिल सकेगी। खासकर प्राइवेट शिक्षण संस्थानों में व्यावसायिक शिक्षा ले रहे छात्रों पर ये आदेश इस बार भी सख्ती से लागू होगा। शासन के इस आदेश से स्नातक एवं उसके समकक्ष व्यावसायिक शिक्षा ग्रहण कर रहे कमजोर वर्ग के विद्यार्थियों की मंशा पर पानी फिर गया है। फीस प्रतिपूर्ति की रकम के सहारे पढ़ाई पूरी करने की तमन्ना पाले छात्रों के लिए ये किसी झटके से कम नहीं है। यदि ऐसे छात्रों के आवेदन की समाज कल्याण विभाग से संस्तुति हो भी गई तो निदेशालय में निरस्त हो जाएगा।