गौरीगंज। महिलाओं के प्रति बढ़ रहे अपराध के मामलों का त्वरित निस्तारण कराने के लिए जिले में जल्द ही फास्ट ट्रैक कोर्ट संचालित होगी।
राज्यपाल ने अमेठी में कोर्ट संचालित करने के लिए हाईकोर्ट की ओर से भेजे गए प्रस्ताव के साथ ही कोर्ट स्टॉफ के लिए पद सृजन को भी मंजूरी दे दी है। शासन का पत्र मिलने के बाद जिला प्रशासन कोर्ट संचालित करने के लिए अस्थाई भवन की तलाश में जुटा है।
महिलाओं के प्रति कारित अपराधों के मामले में त्वरित सुनवाई कर उनका निस्तारण करने के उद्देश्य से संयुक्त निबंधक (न्यायिक) व (सेवाएं) उच्च न्यायालय इलाहाबाद ने पिछले दिनों अमेठी में फास्ट ट्रैक कोर्ट की स्थापना करने का प्रस्ताव शासन के न्याय विभाग को भेजा था।
हाईकोर्ट के प्रस्ताव को शासन के न्याय विभाग ने राज्यपाल के पास भेजकर उस पर मंजूरी देने का अनुरोध किया था। शासन के अनुरोध पर राज्यपाल ने अमेठी में फास्ट ट्रैक कोर्ट की स्थापना के प्रस्ताव व पद सृजन पर अपनी मुहर लगा दी है।
राज्यपाल की अनुमति मिलने के बाद शासन के प्रमुख सचिव दिनेश कुमार सिंह ने महा निबंधक उच्च न्यायालय इलाहाबाद को पत्र भेजकर फास्ट ट्रैक कोर्ट का संचालन शुरू करने तथा जिला प्रशासन को पत्र भेजकर कोर्ट के लिए अस्थाई निशुल्क भवन की व्यवस्था करने को कहा है।
फास्ट ट्रैक कोर्ट का संचालन सुचारु रूप से हो सके इसके लिए राज्यपाल ने आठ पद स्वीकृत किए हैं। स्वीकृत पदों में सिविल जज का एक, आशु लिपिक ग्रेड-3 का एक तथा वरिष्ठ सहायक व कनिष्ठ सहायक के दो-दो पद शामिल हैं। अर्दली व चपरासी के एक-एक पद पर कर्मचारियों को आउट सोर्सिंग के जरिए रखा जाएगा।
सूत्रों की मानें तो जल्दी भवन नहीं मिलने की स्थिति में फास्ट ट्रैक कोर्ट का संचालन जिला एवं सत्र न्यायालय के लिए आरक्षित परिसर में हो सकता है। जिला एवं सत्र न्यायालय के लिए आरक्षित इस परिसर में फिलहाल सिर्फ जिला जज का कार्यालय ही संचालित हो रहा है।
अब तक महिलाओं से जुड़े मामलों की सुनवाई सुल्तानपुर (अमेठी, गौरीगंज व मुसाफिरखाना तहसील) तथा रायबरेली (तिलोई तहसील) में होती थी।
ऐसे में महिलाओं को सुनवाई के लिए नियत प्रत्येक तिथि पर इन जिलों की दौड़ लगानी पड़ती थी। जिले में फास्ट ट्रैक कोर्ट संचालित होने से महिलाओं को दूसरे जिलों की दौड़ लगाने से निजात मिल सकेगी।