नोटबंदी के बाद से सब्जियों के दाम में कमी आ गई है। इसका सीधा फायदा किसानों को न मिलकर थोक व फुटकर सब्जी विक्रेताओं को मिल रहा है। बीते 10 दिन के दौरान सब्जियों के दाम में एकाएक गिरावट आ गई। हालत यह है कि सब्जी की खेती करने वाले किसानों को अब लागत भी निकालना मुश्किल हो गया है।
जनपद में नोटबंदी का असर हर व्यवसाय पर पड़ा है। ग्रामीण अंचलों में बड़ी संख्या में किसान सब्जी की खेती कर अपने परिवार का खर्च चला रहे हैं। नवंबर व दिसंबर के प्रथम सप्ताह तक सहालग की धूम थी। नोटबंदी के चलते सब्जी के थोक व्यापारी किसानों की सब्जियों को कम रेट पर लेकर खूब मुनाफा कमाया। 10 दिन के भीतर हरी व सूखी सब्जियों के दाम में एकाएक गिरावट आ गई।
कुछ सब्जियों के दाम आधे तो कुछ के रेट में मामूली अंतर आया है। किसानों की तीन-चार माह की कड़ी मशक्कत के बाद खेतों में तैयार सब्जियों के दाम इस समय नोटबंदी की वजह से काफी गिर गए हैं। किसान सब्जियों की लागत भी नहीं निकाल पा रहे हैं। शादी-ब्याह के दौरान थोक व फुटकर सब्जी के विक्रेताओं ने इसका भरपूर फायदा उठाया। हरी सब्जी व मशरूम के विक्रेता मो. अयूब ‘मामू’ ने बताया कि सब्जियों के दाम में भारी गिरावट आने के बाद भी बिक्री कम हो रही है। सब्जी बाजार में भी नोटबंदी का असर है।
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