चीनी मिल के गन्ना यार्ड में ट्रैक्टर से उतार कर ट्रेलर पर लोड किया जा रहा गन्ना।
सुल्तानपुर। गन्ने का उचित मूल्य नहीं मिलने से किसान मायूस हैं। जिले के किसान अब गन्ने की खेती से ऊबने लगे हैं। जिले का गन्ना हैदरगढ़ चीनी मिल में डायवर्ट करने से किसानों को आघात पहुंचा है। गन्ने की गुणवत्ता पर हैदरगढ़ चीनी मिल की ओर से खामियां निकालने से किसानों में रोष है।
इस बार जिले की किसान सहकारी चीनी मिल 55 दिन के पेराई सत्र में यांत्रिक खराबी के चलते चार दिन बंद रही। चीनी रिकवरी दर भी सरकारी भाव तक नहीं पहुंच सकी। इसके चलते कई किसानों को गन्ना औने-पौने दामों में बेचना पड़ा। गन्ना विकास एवं चीनी उद्योग के अधिकारियों ने चीनी मिल की हालत को देखते हुए पेराई बंद करने का आदेश जारी कर दिया। इस दौरान चीनी मिल 4.62 लाख क्विंटल ही गन्ने की पेराई कर सकी थी। मिल बंदी के दौरान गन्ना यार्ड में करीब 180 किसानों की गन्ना लदी ट्रैक्टर-ट्रॉलियां मौजूद थीं।
गन्ना किसानों ने बताई अपनी पीड़ा
भटपुरा निवासी किसान राजेश वर्मा ने बताया कि दो ट्रॉली गन्ने की तौल कराने के लिए पांच दिन तक इंतजार किया। तौल के समय हैदरगढ़ चीनी मिल प्रबंधन ने गन्ने की गुणवत्ता पर सवाल उठा गए। गन्ने को रिजेक्ट प्रजाति में बताते हुए 355 रुपये प्रति क्विंटल खरीद की बात कही। तब वे अपना गन्ना लेकर चले गए। इसके अलावा रामसुबरन एक ट्रॉली, दूधनाथ एक ट्रॉली, विजय बहादुर एक ट्रॉली और बनवारी भी अपना एक ट्रॉली गन्ना लेकर घर चले गए।
सभी किसानों का खरीदा जाएगा गन्ना
हैदरगढ़ चीनी मिल के मुख्य महाप्रबंधक विनोद कुमार यादव ने बताया कि सभी किसानों का गन्ना खरीदा जाएगा। किसानों को परेशान होने की जरूरत नहीं है। किसान जल्दबाजी में आकर अपना गन्ना औने-पौने दाम में कतई न बेचें।