सुल्तानपुर। जमीन रजिस्ट्री में धोखाधड़ी रोकने के लिए सरकार और सख्त इंतजाम कर रही है। अब रजिस्ट्री कराने वाले की पहचान अंगुलियों के निशान के साथ रेटिना से भी किया जाएगा। इसके लिए उप निबंधक कार्यालय के सॉफ्टवेयर को अपडेट किया जा रहा है। अब आंखें बता देंगी कि जमीन का असली और नकली मालिक कौन है। शासन स्तर पर ऐसी व्यवस्था लागू करने की तैयारी चल रही है।
वर्तमान में रजिस्ट्री के दौरान पहचान के लिए दोनों हाथों की अंगुलियों के निशान मशीन से स्कैन किए जाते हैं। इसके बावजूद कुछ मामलों में गड़बड़ी सामने आने पर शासन ने व्यवस्था को और मजबूत बनाने का निर्णय लिया है। स्टाम्प उप महानिरीक्षक धर्मेंद्र चौधरी के अनुसार नए सॉफ्टवेयर में आधार कार्ड की फोटो और आंखों के रेटिना के मिलान की व्यवस्था होगी, जिससे रजिस्ट्री कराने वाले की पहचान और अधिक सटीक हो सकेगी। इसे लागू करने का आदेश अभी जारी नहीं हुआ है, लेकिन सॉफ्टवेयर अपडेट होने के बाद व्यवस्था लागू किए जाने की संभावना है। जिले के पांचों उप निबंधक कार्यालयों में फिलहाल अंगुलियों के निशान के आधार पर रजिस्ट्री हो रही है। नई तकनीक लागू होने से फर्जी पहचान के जरिए जमीन या मकान की रजिस्ट्री कराना लगभग असंभव हो जाएगा।
गवाहों के लिए आधार सत्यापन जरूरी
अभी तक उप निबंधक कार्यालयों में अक्सर गवाहों की पहचान को लेकर संशय रहता था। कई बार विवादित जमीनों में फर्जी गवाह खड़े कर दिए जाते थे। अब गवाहों का आधार सत्यापन अनिवार्य होने से उनकी पहचान डाटाबेस में हमेशा के लिए दर्ज हो जाएगी।इससे भविष्य में कानूनी विवाद होने पर गवाह अपनी जिम्मेदारी से मुकर नहीं पाएंगे।
यह नियम बेनामी संपत्तियों के पंजीकरण को रोकने और रियल एस्टेट सेक्टर में निवेश करने वाले आम जन के हितों की रक्षा करने में सहायक होगा। इसके अंतर्गत किसी तरह के विवाद की स्थिति होने पर अब गवाह पर भी कानूनी शिकंजा कसा जा सकेगा। विवादित जमीनों में फर्जी गवाह नहीं खड़े किए जा सकेंगे।
मशीन पर अंगूठा लगाते ही दिल्ली में केंद्रीय सर्वर से होगी पहचान
निबंधन विभाग के पोर्टल को यूआईडीएआई के सर्वर से जोड़ दिया गया है। जैसे ही पक्षकार बायोमीट्रिक मशीन पर अंगूठा लगाएंगे, दिल्ली स्थित केंद्रीय सर्वर से तत्काल उनकी पहचान की पुष्टि हो जाएगी। पहचान सही पाए जाने पर ही सॉफ्टवेयर रजिस्ट्री की प्रक्रिया को आगे बढ़ाएगा। अभी तक केवल आधार की फोटोकॉपी से काम चल जाता था, जिससे फर्जी आधार कार्ड के जरिए दूसरे की जमीन बेचने की आशंका बनी रहती थी।
ये होंगे फायदे
- फर्जीवाड़े और विवादित रजिस्ट्री पर रोक लगेगी
- असली मालिक की पहचान और अधिक सुरक्षित होगी
- अदालतों में चलने वाले भूमि विवादों की संख्या घटने की उम्मीद
- पारदर्शिता बढ़ने से आम लोगों का भरोसा मजबूत होगा