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Sultanpur News: खुले में तार, फायर सिस्टम कबाड़, आग से खेल रहे सरकारी अस्पताल

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मोतिगरपुर स्वास्थ्य केंद्र के बिजली बोर्ड के पास खुले तार। - फोटो : मोतिगरपुर स्वास्थ्य केंद्र के बिजली बोर्ड के पास खुले तार।
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सुल्तानपुर। आए दिन अस्पतालों में आग लगने की घटनाओं से स्वास्थ्य विभाग सबक नहीं ले रहा है। जिले के सीएचसी-पीएचसी पर सुरक्षा उपकरण ही नदारद हैं। मानक के तहत दो सौ वर्ग मीटर में एक अग्निशमन यंत्र लगना चाहिए। इसके अलावा 25 से 50 हजार लीटर पानी की टंकी, फायर हौज रील, स्प्रिंकलर, फायर अलार्म व पाइप लगा होना चाहिए। हालांकि, मुख्यालय पर मेडिकल कॉलेज के नए भवन में इससे बचाव के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं, लेकिन ट्राॅमा सेंटर में आग से बचाव के इंतजाम नाकाफी हैं।
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मोतिगरपुर अस्पताल में ही लगा है ट्रांसफार्मर, खुले हैं तार
मोतिगरपुर। स्व. धर्मराज पाठक सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में इलेक्ट्रीशियन की नियुक्ति नहीं है। परिसर में लगे 25 केवी ट्रांसफॉर्मर पर ओवरलोड के चलते कई बार शाॅर्ट सर्किट हो चुकी है। क्षमता वृद्धि के लिए अधीक्षक ने विभागीय अधिकारियों और क्षेत्रीय जन प्रतिनिधियों को पत्र भी भेजा है। अस्पताल के प्रसव कक्ष से पहले एक कमरे में बने पॉवर रूम का दरवाजा ठीक से बंद नहीं होता। पॉवर रूम में लगे लगभग सभी तार खुले हुए हैं। उन पर टेप भी नहीं चिपकाया गया है। अस्पताल भवन के पिछले हिस्से में लगे खंभे में भी बिजली विभाग ने केबल को लपेट दिया है। उसमें इंसुलेटर भी नहीं लगाया गया है। अधीक्षक डॉ. अवनीश मिश्र ने बताया कि अस्पताल में शाॅर्ट सर्किट की समस्या नहीं है। हर तीसरे महीने जांच कराई जाती है।
घटना के बाद जागा स्वास्थ्य महकमा
भदैया। राजस्थान के जयपुर में सरकारी अस्पताल में बिजली की शाॅर्ट सर्किट से आग लगने पर प्रदेश में भी अलर्ट जारी किया गया है। मंगलवार को भदैंया सीएचसी में बिजली व्यवस्था दुरुस्त करने के साथ ही वायरिंग की जांच पड़ताल की गई। सीएचसी प्रभारी डाॅ. आरपी सिंह ने बताया कि नया भवन होने से यहां पर भूमिगत वायरिंग से बिजली आपूर्ति हो रही है। कहीं पर तार व कटा केबल नहीं है। समय-समय पर चेकिंग कराई जाती है।
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अस्पताल परिसर से गुजरा हाईटेंशन तार

करौंदीकला। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र परिसर में ही ट्रांसफार्मर रखा गया है। यह जमीन से महज चार फीट की ऊंचाई पर है, जिससे कभी भी कोई दुर्घटना हो सकती है। परिसर से गुजरे हाई टेंशन तार भी जर्जर हो चुके हैं। इससे शॉर्ट सर्किट होने का खतरा बना रहता है। अस्पताल के वार्ड सहित अन्य कक्ष में अग्निशमन यंत्र मौजूद मिले।
ट्रॉमा सेंटर में भी नहीं है पर्याप्त इंतजाम
सुल्तानपुर। शहर से सटे अमहट में बने ट्राॅमा सेंटर में भी आग से बचाव के पर्याप्त इंतजाम नहीं हैं। जबकि यहां पर बगल में ही सीटी स्कैन सेंटर भी है। कमरों में लगे वायर पुराने हो चुके हैं। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र शंभूगंज, बेलसौना, छीतेपट्टी, विजेथुआ, धम्मौर, मुड़िलाडीह, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लंभुआ, कूरेभार, दोस्तपुर, अखंडनगर में भी आग लगने पर बचाव के पर्याप्त इंतजाम नाकाफी हैं।
कराया गया है सुरक्षा ऑडिट, कमियों में होगा सुधार
शासन के निर्देश पर सरकारी अस्पतालों का सुरक्षा ऑडिट कराया गया है। कुछ कमियां मिलीं थी,जिन्हें दुरूस्त करने का काम चल रहा है। मरीजों की सुरक्षा का पूरा ख्याल रखा जा रहा है।- डॉ. भारत भूषण, मुख्य चिकित्सा अधिकारी
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