सुल्तानपुर। कोविड-19 के चलते मार्च महीने से लॉकडाउन हुआ तो लोगों की दिनचर्या बदलने लगी। क्षेत्र के रामपुर हनुमानगंज के केले की खेती करने वाले एक किसान ने समय का सदुपयोग करते हुए खेती का क्षेत्रफल बढ़ाया व बेहतर उपज से तीन गुना अधिक फसल तैयार कर ली। इस समय केले का भाव भी बढ़ा है। इससे उसे अधिक लाभ मिलने की उम्मीद है।
भदैंया विकास खंड के रामपुर हनुमानगंज गांव निवासी चंद्रप्रकाश मिश्र ने कोरोना काल में समय का सदुपयोग किया। केले की खेती से वे आत्मनिर्भरता के साथ ही आर्थिक रूप से सशक्त होकर हर मुश्किल आसान कर रहे हैं। कोरोना काल के पहले चंद्रप्रकाश ने पांच बीघे खेत में केले की खेती की थी। मार्च के बाद खेती का दायरा बढ़ाकर पंद्रह बीघा कर दिया।
उन्होंने कोरोना काल में कड़ी मेहनत व देखरेख कर अपने खेत में केले की अच्छी फसल तैयार कर ली। चंद्रप्रकाश मिश्र बागवानी कृषि विभाग की देखरेख में टिशू कल्चर विधि से तैयार उन्नत किस्म की केले की आधुनिक खेती कर बेहतर उत्पादन के साथ अन्य किसानों के लिए प्रेरणास्रोत बने हैं।
22 साल पहले 1998 में चंद्रप्रकाश ने केले की खेती की शुरुआत एक बीघा से की। फिर उद्यान विभाग की देखरेख में वर्ष 2005 में एक बीघे से एक एकड़ में केले की खेती शुरू की। तब से केले की खेती से अच्छा मुनाफा होने पर पांच बीघे में केले की खेती कर रहे हैं।
लोग उनको केला मिश्र के नाम से जानते हैं। आवारा पशुओं, जंगली सुअर व वनरोज से फसल की सुरक्षा को लेकर उन्हें शुरुआत में दिक्कतें आईं। 2018 में खेत के चारों तरफ केले के पैसे से चार लाख खर्च कर लोहे का एंगल व तार से बैरिकेडिंग कर फसल सुरक्षित की है।
केले की फसल तैयार होने के बाद उसकी खरीदारी के लिए मंडी से व्यापारी व दुकानदार आकर तैयार फसल को ले जाते हैं। चंद्रप्रकाश बताते हैं कि एक बीघे में किसान एक से डेढ़ लाख रुपये का मुनाफा कमा सकते हैं। फसल अच्छी होने के चलते एक पौध में 40 से 45 किलो वजन की घार (घौद) लगी है।
12 से 1,650 रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से तैयार फसल खेत से ही बिकती है। मंडी में इस समय 1,850 रुपये प्रति क्विंटल केले का भाव चल रहा है। इस वर्ष उन्हें 10 से 15 लाख रुपये की आय होने का अनुमान है।