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करीब सात माह बाद फिर विद्यालयों का मुंह देख सकेंगे डेढ़ लाख बच्चे

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सुल्तानपुर। जिले के 360 माध्यमिक विद्यालयों के डेढ़ लाख बच्चे करीब सात माह बाद फिर विद्यालयों का मुंह देखेंगे। शासन ने 15 अक्तूबर से विद्यालयों में शिक्षण कार्य को लेकर हरी झंडी दे दी है। कोरोना काल में अब तक ऑनलाइन शिक्षण व्यवस्था के माध्यम से किसी तरह पढ़ाई कर रहे बच्चों को फिर से माध्यमिक विद्यालय में पढ़ने का अवसर मिलेगा।
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घर में रहकर बच्चे ऊब चुके हैं। ऐसे में विद्यालय खुलने को लेकर बच्चों में खासा उत्साह है। हालांकि इन सब के बीच विद्यालयों, अभिभावकों के साथ ही बच्चों के समक्ष भी कोरोना संक्रमण से बचने की चुनौती भी होगी।
जिले में लगभग 360 माध्यमिक विद्यालय संचालित हैं। इसमें उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद से संबद्धता प्राप्त 334 माध्यमिक विद्यालय हैं। लगभग 26 विद्यालय ऐसे हैं, जो केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा परिषद से संबद्ध हैं।
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इसमें यूपी बोर्ड के 25 राजकीय, 58 सहायता प्राप्त व 251 वित्तविहीन माध्यमिक विद्यालय जिले में संचालित हैं। इन विद्यालयों में कक्षा 9 से 12 तक की कक्षाओं में कुल 1,49,926 बच्चे पंजीकृत हैं। ये सभी विद्यालय कोरोना की वजह से मार्च में बंद हो गए थे। तब से करीब सात माह हो गया, बच्चों की विद्यालयों से दूरी बनी हुई है।
अभी तक ई-ज्ञान गंगा व वर्चुअल क्लास के माध्यम से किसी तरह बच्चों को अध्ययन कराया जा रहा है लेकिन जो प्रभाव विद्यालय में पढ़ने से बच्चों पर पड़ता था, वह ऑनलाइन शिक्षण में लाख कोशिशों के बाद भी नहीं हो पाता है। सरकार ने इन विद्यालयों के संचालन को हरी झंडी दे दी है।
बच्चों के अभिभावकों की लिखित सहमति के बाद ही छात्र-छात्राओं को विद्यालय में प्रवेश मिलेगा। जिन स्कूलों को खोलने की अनुमति दी जाएगी, उन्हें शिक्षा विभाग की ओर से जारी निर्देशों का अनुपालन करना होगा। विद्यालय खोलने के पूर्व शिक्षण कक्षों का सैनिटाइजेशन कराया जाएगा।
बैठक व्यवस्था भी कोविड-19 गाइडलाइन के अनुरूप ही होगी। 15 अक्तूबर से विद्यालय खोले जाने की घोषणा के बाद बच्चों में उत्साह का माहौल है। करीब सात माह से घर में रहकर ऊब चुके बच्चे अपने विद्यालय पहुंचकर सहपाठियों से मिलने के लिए उत्सुक हैं।
शासन ने भले ही 15 अक्तूबर से विद्यालय खोलने की गाइडलाइन जारी की हो लेकिन अभिभावक अभी भी बच्चों के स्वास्थ्य को लेकर आशंकित हैं। कोरोना महामारी के चलते अभिभावकों के मन में अभी भी डर बना हुआ है।
फुटेला निवासी दिलीप सिंह कहते हैं कि बच्चों को स्कूल भेजने के पहले विद्यालय से संपर्क कर कोरोना से बचाव के इंतजाम देखना जरूरी है। आश्वस्त होने के बाद ही बच्चों को विद्यालय भेजूंगा। सीताकुंड निवासी कौशलेंद्र प्रताप सिंह भी बच्चों को विद्यालय भेजने को लेकर मानसिक रूप से तैयार नहीं हैं।
वे कहते हैं कि कोरोना महामारी से निपटने के बाद ही विद्यालय का संचालन कराना उचित होगा। श्रीराम नगर निवासी राजीव त्रिपाठी के बच्चे भी माध्यमिक विद्यालय में अध्ययनरत हैं। वे कहते हैं कि कोविड-19 गाइडलाइन का पालन यदि विद्यालय कर रहा है तो बच्चों को भेजने में कोई दिक्कत नहीं है।
राजकीय इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य अनिल कुमार सिंह ने बताया कि शासन एवं जिलाधिकारी की गाइडलाइन के मुताबिक विद्यालय का संचालन कराया जाएगा। बच्चों के आने के पूर्व कक्षाओं का सैनिटाइजेशन कराया जाएगा।
अभिभावकों की लिखित सहमति लेकर ही बच्चों को प्रवेश दिया जाएगा। बच्चों की भीेड़ न हो, इसके लिए विषयवार शिफ्ट तैयार की जाएगी। बच्चों को सोशल डिस्टेंसिंग के हिसाब से बैठाया जाएगा। सभी बच्चों को मास्क लगाकर ही अध्ययन कक्ष में प्रवेश दिया जाएगा।
जिला विद्यालय निरीक्षक जेपी यादव ने कहा कि कोविड-19 को दृष्टिगत रखते हुए माध्यमिक विद्यालयों में कक्षाओं का संचालन शिफ्ट में कराया जाएगा। विद्यालय में आने के पूर्व अभिभावकों की लिखित सहमति ले आना जरूरी है। कक्षा में बच्चों की भीड़ न हो, इसके लिए बैठक व्यवस्था भी उसी हिसाब से कराई जाएगी।
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