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कोर्ट के आदेश से गांवों में ठंडा पड़ गया चुनावी माहौल

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सुल्तानपुर। अब तक प्रचार में जुटे पंचायत चुनाव के दावेदारों का जोश ठंडा पड़ गया है। संभावित प्रत्याशी अब शासन से जारी होने वाले नए आदेश से सशंकित हैं। आरक्षण में बदलाव की स्थिति में कुछ दावेदार बिना लड़े ही बाहर हो जाएंगे, जबकि कई को अखाड़े में उतरने का मौका मिल जाएगा।
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त्रिस्तरीय पंचायत चुुनाव आरक्षण की तीन मार्च को जारी हुई अनंतिम सूची के बाद से ही जिला पंचायत सदस्य, ग्रामप्रधान व बीडीसी के दावेदार मैैदान में कूद पड़े थे। विभिन्न प्रचार माध्यमों के साथ ही दावेदारों ने जनसंपर्क शुरू कर दिया था। वोटरों की खातिरदारी भी बढ़ गई थी।
चारों ओर चुनाव की चर्चाएं भी शुरू हो गई थी। शुक्रवार को कोर्ट के रोक के बाद भी लोग कुछ उम्मीद बनाए थे। सोमवार को कोर्ट की ओर से अनंतिम आरक्षण प्रक्रिया ही रद किए जाने से मैदान में कूदे दावेदारों को करारा झटका लगा है।
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जिला पंचायत सदस्य, बीडीसी व ग्रामप्रधान पद के अधिकांश दावेदार शांत पड़ गए। दावेदारों के प्रचार बंद करते ही गांवों में चुनावी माहौल ठंडा पड़ गया है। यही नहीं मैदान में कूदे दावेदारों की कोर्ट के आदेश ने चिंता बढ़ा दी है।
वर्ष 2015 के आधार पर वार्डों व पंचायतों का आरक्षण किए जाने के कोर्ट के आदेश से दावेदारों को मौजूदा आरक्षण की स्थिति बदल जाने की खतरा दिखाई पड़ने लगा है।
ऐसे में खासकर सामान्य वर्ग व पिछड़े वर्ग के दावेदारों को बिना लड़े ही मैदान से बाहर होने की संभावना बनी है। फिलहाल दावेदारों समेत आमलोगों ने भी पंचायत आरक्षण पर शासन की ओर से जारी होने वाले नए आदेश पर निगाह लगा रखी है।
अभी तक नहीं आया नया शासनादेश
जिला पंचायतराज अधिकारी आरके भारती ने बताया कि अभी तक आरक्षण के संबंध में शासन से कोई नया आदेश नहीं मिला है। नया आदेश मिलने के बाद ही डीएम के निर्देश पर कोई कार्यवाही शुरू की जा सकेगी।
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