डॉ. मनोज कुमार तिवारी, प्रधानाचार्य जीआईसी
सुल्तानपुर। यूपी बोर्ड हाईस्कूल और इंटरमीडिएट परीक्षा परिणाम घोषित होने के बाद सफल छात्रों में खुशी है, वहीं कम अंक पाने वाले या असफल रहे विद्यार्थियों में निराशा देखी जा रही है। विशेषज्ञों ने सलाह दी है कि परीक्षा का परिणाम जीवन का अंतिम पड़ाव नहीं, बल्कि आगे बेहतर करने का अवसर है।
जिले में इस वर्ष हाईस्कूल में 37922 परीक्षार्थियों में से 33501 सफल हुए, जबकि 4421 असफल रहे। वहीं इंटरमीडिएट में 35019 में से 28129 सफल हुए और 6890 छात्र-छात्राएं अनुत्तीर्ण हुए। मेडिकल कॉलेज के मनोचिकित्सक डॉ. राम अनुज वर्मा ने कहा कि छात्र परिणाम को जीवन का पैमाना न बनाएं, यह सिर्फ एक पड़ाव है और असली परीक्षा जीवन की होती है। उन्होंने असफलता से सीख लेकर आगे बढ़ने और खुद को नुकसान पहुंचाने जैसे विचारों से दूर रहने की सलाह दी।
जीआईसी के प्रधानाचार्य डॉ. मनोज कुमार तिवारी ने असफल छात्रों को निराश होने के बजाय आत्म मूल्यांकन करने, कमजोरियों को पहचानने और समय सारणी बनाकर नियमित पढ़ाई कर लक्ष्य तय करने को कहा। बताया कि चिंता छोड़कर चिंतन करने से ही सफलता मिलती है। अभिभावकों को सलाह दी गई है कि वे बच्चों के साथ अधिक समय बिताएं, लगातार संवाद बनाए रखें और अंकों के आधार पर उनका मूल्यांकन न करें। उन्हें अन्य बच्चों से तुलना करने या नकारात्मक बातें कहने से बचना चाहिए और दोस्ताना व्यवहार रखकर खुलकर बात करनी चाहिए।