जिले के किसानों को समय पर फसल बीमा का लाभ नहीं मिल पाता है। पिछले रबी सत्र में चक्रवाती तूफान हुदहुद के कहर से किसानों की फसलें बर्बाद हो गई थीं। बीते खरीफ सत्र के दौरान अनुमान से काफी कम बारिश होने से धान समेत अन्य फसलों में व्यापक नुकसान हुआ था। किसानों के फसलों में नुकसान होने पर उन्हें फसल बीमा का लाभ देने के लिए चलाई जाने वाली संशोधित राष्ट्रीय कृषि बीमा योजना दम तोड़ रही हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से प्रस्तावित राष्ट्रीय फसल बीमा योजना को लेकर किसान काफी आशान्वित हैं।
रबी सत्र 2014-15 के दौरान जिले में चक्रवाती तूफान हुदहुद के आने से किसानों की गेहूं, जौ, राई/सरसों, मसूर, चना, मटर समेत अन्य फसलें बर्बाद हो गई थीं। प्रभावित किसानों को फसल बीमा का लाभ नहीं मिल पाया था। शासन ने किसानों को राहत प्रदान करने के लिए सहायता राशि भेजी थी। बल्दीराय, धनपतगंज समेत कई अन्य इलाके के किसानों को आर्थिक सहायता राशि मिली थी। इन क्षेत्रों के भी काफी किसान सहायता राशि पाने से वंचित रह गए थे जबकि दुबेपुर, कुड़वार, करौंदीकला, मोतिगरपुर, लंभुआ समेत अन्य क्षेत्रों के कुछ चुनिंदा किसानों को ही सहायता राशि मिल पाई थी। इन क्षेत्रों के अधिकतर किसान सहायता राशि पाने से वंचित हो गए थे। फसल नुकसान का लाभ न मिल पाने से किसानों को काफी दुश्वारियां उठानी पड़ी थीं। किसान अभी हुदहुद के कहर से उबर भी नहीं पाए थे कि खरीफ सत्र में भी प्रकृति ने किसानों को दगा दे दिया। बीते खरीफ सत्र के दौरान जिले में अनुमान से काफी कम बारिश हुई थी। बारिश के भरोसे धान की रोपाई करने वाले किसानों को तो धान की फसल से लागत तक नहीं निकल पाई।
प्राइवेट नलकूप, राजकीय नलकूप और नहर से सिंचाई करके किसान किसी तरह से धान की फसल तैयार कर पाए थे। बारिश कम होने से खरीफ की मुख्य फसल धान में काफी कम उत्पादन हुआ था। इसके अलावा अन्य फसलें भी प्रभावित हुई थीं। किसानों को अभी तक न तो बीमा कंपनियों से और न ही सरकार से फसल नुकसान की एवज में कोई सहायता राशि मिल पाई है। किसानों को क्षतिपूर्ति दिलाने के लिए संचालित संशोधित राष्ट्रीय कृषि बीमा योजना महज कागजी बनकर रह गई है। इस योजना का लाभ किसानों को नहीं मिल रहा है।