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कोरोना किट घोटाले में डीपीआरओ के निलंबन के बाद हटाई गईं डीएम

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सुल्तानपुर। कोरोना किट में हुए लाखों रुपये के घोटाले में अधिकारी महंगी दरों की आपूर्ति को ही नहीं बल्कि रेट के शासनादेश को ही नजरअंदाज करते रहे। इसका खामियाजा आखिरकार अधिकारियों को भुगतना पड़ा। डीपीआरओ के निलंबन के बाद शासन ने जिलाधिकारी सी. इंदुमती को भी हटा दिया है। डीएम के हटाने के प्रशासनिक हलके में हड़कंप मचा है।
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कोरोना संक्रमण की रोकथाम के लिए शासन ने ग्राम पंचायतों को पल्स ऑक्सीमीटर, थर्मल स्कैनर व सैनिटाइजर आदि खरीदने का निर्देश दिया था। शासन का निर्देश मिलते ही अधिकारियों से फर्म ने सांठगांठ करके जिले के 986 ग्राम पंचायतों में से अधिकांश ग्राम पंचायतों को महंगी दर चाइनीज इंफ्रारेड थर्मल स्कैनर व पल्स ऑक्सीमीटर की आपूर्ति आनन-फानन में कर दी।
पीपीकमैचा में ब्लॉक प्रमुख प्रतिनिधि व अन्य लोगों के विरोध के बाद अमर उजाला ने 10 जुलाई के अंक में ग्राम पंचायतों को दिया जा रहा चाइनीज इंफ्रारेड थर्मामीटर व पल्स ऑक्सीमीटर शीर्षक से पहली बार कोरोना किट की आपूर्ति का प्रकरण उठाया।
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इसके बाद 14 जुलाई व इसके बाद 15 अगस्त के अंक में शासन ने दिए 2800 के भुगतान के निर्देश, गांवों में पहुंचा 9,950 का बिल शीर्षक से प्रकरण को उठाया। 19 अगस्त को फिर गांवों को दिए गए 9950 रुपये के बिल के भुगतान पर रोक व चार सिंतबर के अंक में फिर ग्राम पंचायतों ने किया ऑक्सीमीटर व थर्मल स्कैनर का भुगतान शीर्षक से खबर प्रकाशित किया।
इसके बाद भी अधिकारी महंगी खरीद व आपूर्ति पर रोक लगाने के बजाय डीपीआरओ समेत अन्य अधिकारी शासन से 24 जुलाई को कोरोना किट का रेट जारी होने के बाद उससे ही अनभिज्ञता जताते रहे। अधिकारी शासकीय ग्रुप के जरिए ग्राम पंचायतों, एडीओ पंचायतों व सेक्रेटरियों पर दबाव बनाकर भुगतान करवाते रहे।
इस बीच बाजार भाव से करीब 27 लाख की कोरोना किट की आपूर्ति तकरीबन 90 लाख के आसपास तक पहुंचा दी गई। शासन की जीरो टॉलरेंस नीति को देखते हुए लंभुआ भाजपा विधायक देवमणि द्विवेदी ने प्रकरण को संज्ञान में लेते हुए मामला सीएम के सामने उठाया। मुख्यमंत्री कार्यालय ने इसे गंभीरता से लेते हुए जांच के आदेश दिए।
प्रथम दृष्टया दोषी पाए जाने पर शासन ने डीपीआरओ केके सिंह चौहान को निलंबित करते हुए एसआईटी गठित करके जांच के आदेश दिए। इसके बाद भी जिले में प्रकरण पर लीपापोती चलती रही।
आखिरकार शासन ने जिलाधिकारी को भी हटा दिया। हालांकि पंचायतराज कार्यालय से शासकीय ग्रुप पर डीएम का हवाला देकर भुगतान के लिए दबाव बनाने वाले व्यक्ति के खिलाफ अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हो सकी है, जबकि विधायक ने शासकीय ग्रुप से भुगतान का दबाव बनाए जाने के प्रकरण को सीएम के समक्ष उठाया है।
मुख्य विकास अधिकारी अतुल वत्स ने कहा कि शासकीय ग्रुप से भुगतान का दबाव बनाए जाने के प्रकरण की जानकारी उन्हें नहीं है। इसकी जानकारी व जांच की जा रही है। प्रकरण जानकारी में आने पर संबंधित के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
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