जयसिंहपुर के देनवा में बैठक करती महिलाएं। स्रोत- विभाग
सुल्तानपुर। जिले में दैवी आपदाओं से होने वाले नुकसान को कम करने के लिए अब ''आपदा सखियां'' गांव-गांव महिलाओं को जागरूक करेंगी। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) के स्वयं सहायता समूहों की 144 महिलाओं को प्रशिक्षित कर स्वयंसेवी बनाया गया है। ये महिलाएं समूह और ग्राम संगठन की बैठकों के माध्यम से आग, बाढ़, सर्पदंश, बिजली गिरने जैसी आपदाओं से बचाव के व्यावहारिक उपाय बता रही हैं।
हर वर्ष आगजनी और अन्य प्राकृतिक आपदाओं में होने वाले नुकसान को देखते हुए शासन ने महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने की पहल की है। आयुक्त के निर्देश पर दैवी आपदा एवं राहत विभाग ने एनआरएलएम के सहयोग से स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं का चयन कर उन्हें आपदा प्रबंधन का प्रशिक्षण दिया।
प्रशिक्षण प्राप्त स्वयंसेवी अब अपने-अपने गांवों में नियमित बैठकों के जरिए जागरूकता अभियान चला रही हैं। बैठकों में घरेलू एलपीजी सिलिंडर से आग लगने पर शुरुआती बचाव, बाढ़ के दौरान सुरक्षित स्थानों पर पहुंचने, सर्पदंश की स्थिति में क्या करें और क्या न करें, बिजली गिरने से बचाव तथा आपात स्थिति में राहत एजेंसियों से संपर्क करने के तरीकों की जानकारी दी जा रही है।
विभाग का मानना है कि घर और परिवार की जिम्मेदारी निभाने वाली महिलाओं के जागरूक होने से आपदा के समय त्वरित और सही निर्णय लेने में मदद मिलेगी। इससे जनहानि के साथ ही संपत्ति के नुकसान में भी कमी आएगी।
बैठकों के माध्यम से महिलाएं कर रहीं जागरूक
अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) एवं दैवी आपदा एवं राहत अधिकारी राकेश सिंह ने बताया कि प्रशिक्षित स्वयंसेवी महिलाएं नियमित बैठकों के माध्यम से ग्रामीण महिलाओं को आपदा से बचाव के प्रति जागरूक कर रही हैं। इस पहल से दैवी आपदाओं के दौरान होने वाले नुकसान को कम करने में मदद मिलेगी।