सुल्तानपुर। कांग्रेस के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी के खिलाफ वर्ष 2014 में अमेठी संसदीय क्षेत्र से लोकसभा चुनाव लड़ रहे कवि व आप नेता कुमार विश्वास के पक्ष में चुनाव प्रचार के दौरान कांग्रेस व भाजपा के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी करने के मामले में आरोपी दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को बुधवार को कोर्ट से राहत मिल गई।
स्पेशल जज एमपी-एमएलए पीके जयंत ने केजरीवाल को अदालत में व्यक्तिगत रूप से तलब करने के अपने आदेश को बदल दिया है। कोर्ट ने केजरीवाल को सुप्रीम कोर्ट से व्यक्तिगत हाजिरी से मिली छूट को बरकरार कर दिया है। उनके अधिवक्ता को कोर्ट ने 26 फरवरी सुप्रीम कोर्ट की प्रमाणित प्रति दाखिल करने का आदेश दिया है। मामला अमेठी जिले के मुसाफिरखाना कोतवाली से जुड़ा है।
आम आदमी पार्टी ने वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव में अमेठी संसदीय क्षेत्र से तत्कालीन सांसद व कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी के खिलाफ कवि व पार्टी के नेता कुमार विश्वास को प्रत्याशी बनाया था। दो मई 2014 को आम आदमी पार्टी के संयोजक व मौजूदा समय में दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने पार्टी प्रत्याशी कुमार विश्वास के पक्ष में मुसाफिरखाना कोतवाली क्षेत्र के औरंगाबाद में चुनावी सभा को संबोधित किया था।
उन्होंने कांग्रेस व भाजपा के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी की थी। उडनदस्ता मजिस्ट्रेट/मुसाफिरखाना तहसील के तत्कालीन नायब तहसीलदार प्रेमचंद ने अरविंद केजरीवाल के खिलाफ चार मई 2014 को मुसाफिरखाना कोतवाली में लोक प्रत िनिधित्व अधिनियम 1951 के तहत केस दर्ज कराया था।
नौ जुलाई 2014 को पुलिस ने केजरीवाल के खिलाफ चार्जशीट कोर्ट में दाखिल की थी। चार्जशीट पर संज्ञान लेकर तलब करने के आदेश को केजरीवाल ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। 27 अक्तूबर 2016 को सुप्रीम कोर्ट ने केजरीवाल को ट्रायल कोर्ट में व्यक्तिगत हाजिरी से अग्रिम आदेश तक छूट प्रदान कर दी थी।
पिछले 15 फरवरी को स्पेशल जज एमपी-एमएलए पीके जयंत ने दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को 26 फरवरी के लिए व्यक्तिगत रूप से तलब कर उनके खिलाफ चार्ज तय करने का आदेश दिया था। बुधवार को केजरीवाल के अधिवक्ता मदन सिंह ने कोर्ट में प्रार्थनापत्र देकर कहा कि सुप्रीम कोर्ट का हाजिरी से छूट देने वाला आदेश अभी तक निरस्त नहीं हुआ है।
कोर्ट ने बचाव पक्ष की दलीलों से सहमत होकर केजरीवाल को तलब करने के अपनेडआदेश को बदलकर उन्हें मिली छूट को बरकरार कर दिया है। कोर्ट ने बचाव पक्ष को निर्देश दिया है कि वह सुप्रीम कोर्ट के आदेश की प्रमाणित प्रति 26 फरवरी को दाखिल करे।