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35 साल बाद भी न बढ़ सकी चीनी मिल की पेराई क्षमता

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सुल्तानपुर। 90 के दशक में स्थापित जिले की इकलौती किसान सहकारी चीनी मिल की पेराई क्षमता तकरीबन 35 साल बीतने के बाद भी नहीं बढ़ पाई है। जर्जर हो चुके मिल के कलपुर्जे हर बार पेराई सत्र के दौरान गन्ना किसानों को रुलाते हैं। मिल में गन्ने की पेराई ठप होने से किसानों को अपने गन्ने की तौल कराने के लिए कड़ाके की ठंड में कई दिन तक इंतजार करना पड़ता है।
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इंडस्ट्री के नाम पर एकमात्र पहचान बनी चीनी मिल का पेराई सत्र बढ़ाने के लिए समय-समय पर माननीयों की ओर से किये गए वादे कोरे साबित हो रहे हैं। जिला विभाजन के बाद सभी कल-कारखाने अमेठी जिले के हिस्से में चले गए हैं। हर वर्ष पेराई सत्र के दौरान तकनीकी खराबी समेत अन्य कारणों से चीनी मिल में गन्ने की पेराई कार्य बाधित होने से गन्ना किसान बेहाल हैं।
पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के पुत्र संजय गांधी ने जिले में गन्ने का उत्पादन देखते हुए चीनी मिल स्थापित कराने की पहल की थी। 90 के दशक में उनके प्रयास से ही शहर से सटे कूरेभार ब्लॉक के सैदपुर गांव में चीनी मिल की स्थापना हुई थी। वर्ष 1984 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री श्रीपति मिश्र की मौजूदगी में किसान सहकारी चीनी मिल का शुभारंभ किया था।
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स्थापना के समय चीनी मिल की एक दिन की पेराई क्षमता 12,500 क्विंटल निर्धारित थी। कुछ वर्षों तक चीनी मिल में पूरी क्षमता के साथ गन्ने की पेराई होती थी। जैसे-जैसे वक्त गुजरा चीनी मिल के कलपुर्जे जर्जर हो गए और मिल में गन्ने की पेराई पूरी क्षमता से होना बंद हो गई।
कलपुर्जों के जर्जर होने से प्रत्येक वर्ष पेराई सत्र के दौरान तकनीकी खराबी समेत अन्य वजह से आए दिन मिल में गन्ने की पेराई बाधित हो जाती है। पेराई बाधित होने से ठंड के मौसम मेें किसानों को परेशानी उठानी पड़ती है। इसके साथ ही एक बार चीनी मिल बंद होने के बाद दोबारा पेराई शुरू होने में ईंधन समेत अन्य खर्चों में मिल को हजारों रुपये का आर्थिक नुकसान होता है।
पिछले कई वर्षों से मिल की पेराई क्षमता बढ़ाने की मांग किसान कर रहे हैं। मगर किसानों की मांग की माननीय अनदेखी कर रहे हैं। वर्ष 2012 के विधानसभा चुनाव के दौरान सपा मुखिया अखिलेश यादव ने जयसिंहपुर (अब सदर) विधानसभा क्षेत्र में आयोजित चुनावी सभा में सार्वजनिक रूप से चीनी मिल की पेराई क्षमता बढ़ाने का वादा किया था।
इसके बाद प्रदेश में सपा की सरकार बनी और अखिलेश यादव ने मुख्यमंत्री का पद संभाला, लेकिन मिल की पेराई क्षमता बढ़ाने का वादा पूरा नहीं हो सका। पिछले लोकसभा चुनाव के दौरान पूर्व कैबिनेट मंत्री मेनका गांधी ने चीनी मिल की पेराई क्षमता बढ़ाने का आश्वासन दिया था, लेकिन यह अभी तक पूरा नहीं हो पाया है। इसका दंश जिले के गन्ना किसानों को झेलना पड़ रहा है।
इस बार पांच दिसंबर 2019 को चीनी मिल में गन्ने की पेराई शुरू हुई थी। तब से कई बार तकनीकी खराबी समेत अन्य कारणों से मिल में गन्ने की पेराई बाधित हो चुकी है। पेराई बाधित रहने से किसानों को कड़ाके की ठंड में परेशानी उठानी पड़ रही है। किसानों को अपने गन्ने की तौल कराने के लिए कई दिन तक इंतजार करना पड़ रहा है।
किसान सहकारी चीनी मिल प्रबंधन की लापरवाही से मिल यार्ड में अलाव, पानी, प्रकाश व सुरक्षा की पर्याप्त व्यवस्था नहीं की गई है। इसका खामियाजा जिले के किसानों को उठाना पड़ रहा है। आए दिन किसानों के ट्रैक्टर से बैट्रियां चोरी हो जाती हैं। पिछले दिनों चोरों ने मिल परिसर से शीशम का पेड़ काट डाला था।
पूर्व केंद्रीय मंत्री व जिले की सांसद मेनका गांधी ने पिछले दिनों जिले के दौरे पर आने से पहले लखनऊ में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात की थी। जिले में कई कार्यक्रमों में शिरकत करने के दौरान सांसद मेनका गांधी ने लोगों को बताया था कि उनकी मुख्यमंत्री से चीनी मिल की पेराई क्षमता बढ़ाने को लेकर बात हुई थी। मुख्यमंत्री ने सांसद को मिल की पेराई क्षमता बढ़ाने की मंजूरी देने की जानकारी दी थी। सांसद के इस प्रयास से मिल की पेराई क्षमता बढ़ने की उम्मीद बढ़ गई है। पेराई क्षमता में वृद्धि होने पर गन्ना किसानों को बड़ी राहत मिलेगी।
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