बघराजपुर में एक साथ पहुंचे छह शव अंतिम संस्कार से सिहर उटे शहरवासी
सुल्तानपुर। शहर के बघराजपुर में बुधवार को जब गुड़ व्यवसायी के घर छह लाशें एक साथ पहुंची तो पूरा मोहल्ला सिहर उठा। परिवार के साथ अन्य लोगों को भी इस पर घटना पर विश्वास ही नहीं हो रहा था।
शहर के गुड़ व्यवसायी व बघराजपुर मोहल्ले के निवासी स्व. रामचंद्र के दो पुत्रियां व छह पुत्र थे। इसमें सबसे बड़े ओमप्रकाश, दूसरे नंबर पर त्रिलोकी, प्रदीप, मनोज, विनोद व सबसे छोटे संदीप हैं। प्रयागराज के सोरांव में आयोजित बहन की ननद के बेटे की शादी में शरीक होने 12 फरवरी को प्रदीप, विनोद व मनोज अपने परिवार के साथ गए थे।
12 फरवरी को घर से शादी समारोह में जाने वाले तीनों के घर वालों को क्या पता था कि आने वाली रात काली है। वापसी में मऊआइमा में हुए हादसे में प्रदीप, मनोज व विनोद (तीनों सगे भाइयों) व विनोद की पत्नी शालिनी, उसकी छह माह की बेटी व एक भांजी की मौत ने ऐसा जख्म दे दिया जो पीढ़ियों तक नहीं भूलेगा।
हादसे में कसौंधन परिवार के पांच व एक भांजी की मौत से पूरा परिवार ही नहीं आसपास के लोग भी सिहर उठे हैं। बुधवार को जब छह शव एक साथ घर पहुंचे तो लोगों की आंखें छलक आई। परिवार के बचे अन्य सदस्य बेसुध हो गए हैं। किसी को ऐसी घटना पर विश्वास ही नहीं हो रहा है। दिन भर सात्वंना देने वालों का तांता लगा रहा।
एक साथ छह चिताएं जलीं तो फफक पड़े लोग
शहर स्थित गोमती नदी के हथियानाला घाट पर जब कसौंधन परिवार के पांच लोगों की चिताएं एक साथ जलीं तो लोगों की रूह कांप गई। प्रदीप के बड़े भाई त्रिलोकी ने पांच को मुखाग्नि दी तो वहां मौजूद लोग फफक पड़े। हादसे का शिकार हुए तीनों सगे भाइयों व विनोद की पत्नी शालिनी व भांजी का दाह संस्कार किया गया जबकि छह माह के विनोद के मासूम बेटे को मिट्टी दी गई।
दो लड़कियों के सिर से उठा मां-बाप का साया
हादसे के बाद कसौंधन परिवार के लोग बेसुध हैं। रिश्तेदार नारायण कसौंधन ने बताया कि हादसे का शिकार हुए प्रदीप के तीन बेटियां हैं जबकि मनोज को एक बेटा व दो बेटियां। विनोद को दो बेटियां व एक बेटा था। हादसे में मासूम की मौत के बाद विनोद की सिर्फ दो बेटियां बची हैं। दोनों बेटियों के सिर से माता-पिता का साया उठ गया।