सुल्तानपुर। दहेज हत्या के 11 साल पुराने मामले में एफटीसी प्रथम कोर्ट ने शुक्रवार को अपना फैसला सुनाया। फ़ास्ट ट्रैक कोर्ट जज विजय कुमार गुप्ता की अदालत ने मामले में आरोपी पति को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया है, जबकि सास-ससुर व ननद को दहेज हत्या सहित अन्य आरोपों में दोषी करार दिया है। अदालत ने दोषी ससुर ज्ञानेंद्र सिंह को 10 साल के कठोर कारावास व सास ऊषा सिंह, ननद सरिता सिंह को सात साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने सभी दोषियों पर कुल 27 हजार रुपये का अर्थदंड लगाया है।
आजमगढ़ जिले के देवगांव के कोटाखुर्द के रहने वाले वादी रविप्रकाश सिंह के मुताबिक उन्होंने छह दिसंबर 2014 को करौंदीकला के गजेंद्रपुर निवासी आरोपी संतोष सिंह के साथ अपनी बहन प्रतिमा सिंह का विवाह किया था। आरोपी ससुरालीजन उनकी बहन को दहेज की मांग कर प्रताड़ित करते रहे और मांग न पूरी होने पर तीन अगस्त 2015 को उसकी हत्या कर दी थी।
वादी रविप्रकाश सिंह की तहरीर पर करौंदीकला थाने में आरोपियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई और चार्जशीट भी दाखिल हुई। मामले का विचारण फास्ट ट्रैक कोर्ट प्रथम की अदालत में चला। अदालत ने आरोपी संतोष सिंह को घटना के समय बाहर रहने की वजह से संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया है, जबकि आरोपी सास-ससुर व ननद को कठोर कारावास की सजा सुनाते हुए जेल भेजने का आदेश दिया है।