सुल्तानपुर। जिले में 874 संविदा कर्मियों की हड़ताल से अस्पतालों में स्वास्थ्य सेवाएं चरमरा गई हैं। इमरजेंसी को छोड़कर ज्यादातर सेवाएं प्रभावित हैं। मेडिकल कॉलेज की पुरानी बिल्डिंग में संचालित आयुष विंग बंद होने से रोजाना एक हजार मरीज बिना इलाज लौट रहे हैं। वहीं, 204 आयुष्मान आरोग्य मंदिर 30 सितंबर से बंद हैं। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में प्रतिदिन तीन से चार हजार मरीजों को परेशानी उठानी पड़ रही है।
ग्रामीण क्षेत्रों में प्राथमिक स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए संचालित आयुष्मान आरोग्य मंदिरों पर 14 तरह की जांच की सुविधा मिलती है। इनमें मलेरिया, डेंगू, हीमोग्लोबिन, एचआईवी, सिफिलिस, ब्लड शुगर और यूरिन प्रोटीन की जांच शामिल है। टेलीमेडिसिन के जरिये विशेषज्ञ चिकित्सकों से परामर्श दिया जाता है। हड़ताल के चलते ये सुविधाएं ठप हैं।
आयुष विंग में ओपीडी बंद, मरीज लौटे
मेडिकल कॉलेज की पुरानी बिल्डिंग में संचालित आयुष विंग में आयुर्वेद, यूनानी और होम्योपैथिक विभागों की ओपीडी बंद है। यहां प्रतिदिन एक हजार मरीज इलाज कराने आते हैं। होम्योपैथिक दवा लेने पहुंचे रजनीश ने बताया कि उनकी नियमित दवा चल रही है। दवा खत्म होने पर पहुंचे तो ओपीडी बंद मिली। आयुर्वेदिक विंग में दवा लेने आए बुजुर्ग राम नरेश ने बताया कि खांसी की दवा चल रही है। डॉक्टर ने दवा बदलने की सलाह दी थी, लेकिन चिकित्सक नहीं मिलने से दवा नहीं मिल सकी।
टीकाकरण और गर्भवती महिलाओं की देखभाल प्रभावित
अमहट। संविदा और एनएचएम कर्मियों की हड़ताल से टीकाकरण, गर्भवती महिलाओं के पंजीयन और देखभाल पर असर पड़ा है। टीबी, आरबीएसके और ओपीडी सेवाएं भी बाधित हैं। सामुदायिक और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर ब्लॉक प्रोग्राम मैनेजमेंट यूनिट और डाटा ऑपरेटिंग से जुड़े काम प्रभावित हैं। संचारी रोग अभियान पर असर पड़ा है। उत्तर प्रदेश स्वास्थ्य मिशन संविदा कर्मचारी संघ के अध्यक्ष डॉ. आकर्ष शुक्ला ने कहा कि मांगें पूरी होने तक हड़ताल जारी रहेगी।
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गांवों में इलाज के लिए भटक रहे मरीज
भदैंया। ब्लॉक के सभी 21 आयुष्मान आरोग्य मंदिर बंद हैं। यहां रोज करीब 500 मरीजों को स्वास्थ्य सेवाएं मिलती थीं। बृहस्पतिवार को केंद्र पर इलाज कराने पहुंची राजकली ने बताया कि उन्हें सांस फूलने की समस्या है। हड़ताल की जानकारी नहीं थी। केंद्र बंद मिलने पर अब जिला मुख्यालय जाना पड़ेगा। बुखार से पीड़ित राम फेर भी गांव में इलाज की उम्मीद लेकर पहुंचे थे, लेकिन डॉक्टर नहीं मिलने से उन्हें निराश लौटना पड़ा।
मेडिकल कॉलेज के पुरानी बिल्डिंग में बंद आयुष विंग। संवाद