मेडिलक कॉलेज के बाल रोग विभाग की ओपीडी में इलाज करते डॉ. श्यामकरन।
- फोटो : ढाबा संचालकों को यातायात की जानकारी देते सीओ व यातायात प्रभारी।
सुल्तानपुर। कड़ाके की पड़ रही ठंड की चपेट में छोटे बच्चे भी आने लगे हैं। ठंडी से बच्चों में सर्दी, जुकाम के साथ सांस की बीमारी बढ़ गई है। मेडिकल काॅलेज के बाल रोग विभाग की ओपीडी में इस समय रोजाना करीब 200 से 250 मरीज पहुंच रहे हैं। इसमें सबसे अधिक मरीज बुखार, सर्दी, जुकाम व सांस के हैं। महिला अस्पताल में संचालित बाल रोग विभाग की ओपीडी में सोमवार को दो बजे तक 200 बच्चे इलाज के लिए आए थे।
मेडिकल कॉलेज के बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. श्याम करन ने बताया कि इस समय बढ़ी ठंड व प्रदूषण से बच्चों के फेफड़ों पर असर पड़ रहा है। बच्चों को सांस लेने व कफ जमने की परेशानी के मामले सामने आ रहे हैं। तापमान में आई गिरावट से अस्थमा, सर्दी-जुकाम, बुखार और एलर्जी के मरीज बढ़ रहे हैं। बच्चों में सांस संबंधी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं। खासकर, छोटे बच्चों और शिशुओं में सर्दी-खांसी जैसे मामूली लक्षणों की अनदेखी करने से बीमारी निमोनिया में बदल रही है।
बच्चों में खांसी, बुखार, ठंड लगना, सांस लेने में तकलीफ और सीने में दर्द के अलावा मतली, उल्टी और दस्त निमोनिया के लक्षण हैं। उन्होंने ठंड से बचाव के लिए बच्चों को गर्म कपड़े पहनाने, पौष्टिक भोजन देने, अदरक, तुलसी और शहद का काढ़ा पिलाने की सलाह बच्चों के अभिभावकों को दी।
छुट्टी के बाद खुली ओपीडी, बढ़ी मरीजों की भीड़
मेडिकल कॉलेज के पुरुष अस्पताल की ओपीडी छुट्टी के बाद सोमवार को खुली तो मरीजों की भीड़ उमड़ पड़ी। 1500 से अधिक मरीजाें का पंजीकरण हुआ। फिजिशियन की ओपीडी में अधिक भीड़ रही, इससे चिकित्सकों को दिखाने में मरीजों को एक घंटे से अधिक कतार में लगानी पड़ी। औषधि वितरण काउंटर के सामने दवा लेने के लिए मरीजों को कड़ी मशक्कत करनी पड़ी। हर कतार में भीड़ अधिक होने से दवा लेने के लिए मरीजों को एक घंटे से अधिक कतार में लगना पड़ा।