सूबे के कैबिनेट मंत्री गायत्री प्रसाद प्रजापति पर गैंगरेप और पॉक्सो जैसे संगीन मामले में केस दर्ज होने के बावजूद सोमवार को उनके समर्थन में सभा करने पहुंचे मुख्यमंत्री बेहद सतर्क रहे। उन्होंनेे न गायत्री को अपने साथ मंच साझा करने दिया, न ही उनके मामले पर कोई सफाई दी। उन्होंने गायत्री का नाम तक लेना मुनासिब नहीं समझा।
दोपहर बाद करीब पौने दो बजे मंच पर पहुंचते ही अखिलेश यादव ने सीधे माइक संभाला। सीएम ने अपनी सरकार की योजनाओं का सिलसिलेवार जिक्र किया। नोटबंदी के मुद्दे पर पीएम नरेंद्र मोदी और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह को घेरते हुए कहा कि उन्होंने अच्छे दिनों का वादा कर लोगों को लाइन में लगा दिया। इसमें गरीबों की जान गई तो मदद सपा ने की। पीएम मन की बात करते हैं लेकिन काम की नहीं।
उन्होंने पीएम के विद्युत आपूर्ति में भेदभाव बरतने के आरोप का जवाब देते हुए कहा कि जिस काशी से पीएम सांसद हैं उसे 24 घंटे बिजली मैं दे रहा हूं। सभा की खास बात यह रही कि मुख्यमंत्री जिस गायत्री के समर्थन में सभा करने पहुंचे थे उन्हें अपने साथ मंच तक साझा नहीं करने दिया। सीएम ने अपने 20 मिनट के भाषण से लेकर रवाना होने तक गायत्री का एक बार भी नाम नहीं लिया। यह स्थिति तब रही जब पीएम की ओर से लगाए गए आरोपों के जवाब में सीएम ने बदायूं कांड व सुल्तानपुर जिले की जयसिंहपुर सीट से सपा विधायक अरुण वर्मा पर लगे गैंगरेप व बाद में युवती की हत्या के मामले में खुलकर उनका बचाव किया। अमेठी के पहले गौरीगंज के नंदमहर में हुई जनसभा में उन्होंने राकेश प्रताप सिंह के लिए समर्थन मांगा।