सुल्तानपुर। एक ओर जहां प्रदेश सरकार बेसिक स्कूलों का स्तर सुधारने की कवायद में लगी है, वहीं शहरी इलाकों में मौजूद विद्यालयों में अध्यापन के लिए शिक्षक ही नहीं हैं।
शहर के 12 प्राइमरी स्कूल ऐसे हैं, जहां एक भी शिक्षक कार्यरत नहीं हैं। ये स्कूल शिक्षामित्रों के भरोसे जैसे-तैसे संचालित हो रहे हैं।
जिले में 1735 प्राथमिक एवं 612 उच्च प्राथमिक विद्यालय संचालित हैं, जिनमें लगभग सवा दो लाख छात्र-छात्राएं अध्ययनरत हैं। शहर के 32 प्राथमिक विद्यालय नगर क्षेत्र में चल रहे हैं।
इन विद्यालयों मेें 2207 बच्चे पंजीकृत हैं। इसमें 1130 छात्र व 1077 छात्राएं शामिल हैं। इन 32 प्राथमिक विद्यालयों में एक प्रधानाध्यापक व 90 सहायक अध्यापक का पद सृजित है।
सृजित पदों के सापेक्ष आठ प्रधानाध्यापक व 13 सहायक अध्यापक कार्यरत हैं। इस हिसाब से कुल 91 शिक्षकों के सापेक्ष 21 अध्यापकों की ही तैनाती है जबकि 70 अध्यापकों के पद रिक्त हैं।
इन विद्यालयों में 40 शिक्षामित्रों की तैनाती है जिनसे किसी तरह पढ़ाई कराई जा रही है। कमोबेश यही हाल उच्च प्राथमिक विद्यालयों का भी है। नगर क्षेत्र में छह जूनियर हाईस्कूल संचालित हैं।
इन विद्यालयों में कुल 318 बच्चे पंजीकृत हैं। इसमें 167 बालक व 151 बालिकाएं शामिल हैं। नगर क्षेत्र के छह जूनियर हाईस्कूलों के लिए एक प्रधानाध्यापक व 18 सहायक अध्यापकों का पद सृजित है, जिसके सापेक्ष एक प्रधानाध्यापक व आठ सहायक अध्यापक ही काम कर रहे हैं।
प्राथमिक विद्यालय बढ़ैयावीर, सिविल लाइन, डड़वा, देवगढ़, गभड़िया प्रथम, गभड़िया द्वितीय, घरहां, गोराबारिक, लोहरामऊ, लोलेपुर, मेजरगंज प्रथम, मुराईटोला, शाहगंज, शास्त्रीनगर और संगमलाल में सिर्फ एक-एक शिक्षक काम कर रहे हैं। खैराबाद व देवगढ़ उच्च प्राथमिक विद्यालय में भी एक-एक शिक्षक ही तैनात हैं।
शहरी क्षेत्र के विद्यालयों में शिक्षकों की कमी का आलम यह है कि दो प्राथमिक व एक उच्च प्राथमिक विद्यालय में न कोई शिक्षक तैनात है और न ही कोई शिक्षामित्र ही है। विद्यालयों में पढ़ाई की व्यवस्था अन्यत्र विद्यालयों के शिक्षक संबद्ध कर कराई जा रही है।
परिषदीय प्राथमिक विद्यालय प्यारेपट्टी व घासीगंज में न शिक्षक हैं और न ही शिक्षामित्र की ही तैनाती है। वहीं जूनियर हाईस्कूल नगर पालिका में भी कोई शिक्षक या अनुदेशक कार्यरत नहीं है। इन तीनों परिषदीय विद्यालयों में पढ़ाई की व्यवस्था उधार के शिक्षकों पर है।
नगर क्षेत्र के एबीआरसी पंकज सिंह ने बताया कि शिक्षकों की कमी से नगर क्षेत्र के विद्यालयों में पढ़ाई सुचारु रूप से नहीं हो पा रही है। एक शिक्षक अथवा शिक्षामित्र पांच कक्षाएं कैसे संचालित कराएगा, यह बड़ा सवाल है।