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बाल रोग विशेषज्ञों की कमी से दम तोड़ रहे नवजात शिशु

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सुल्तानपुर। जिले में चिकित्सकों की कमी से स्वास्थ्य सेवाएं धरातल पर नहीं उतर पा रही हैं। सबसे बुरा हाल बच्चों का है। सीएचसी पर बाल रोग विशेषज्ञ की कमी से रेफर होने वाले कई बच्चे रास्ते में ही दम तोड़ देते हैं। जिले के 14 सीएचसी में मात्र दो पर ही बाल रोग विशेषज्ञ तैनात हैं।
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ग्रामीण अंचल में पैदा होने वाले नवजात शिशुओं पर ठंड की मार ज्यादा पड़ रही है। जिले में कुल 14 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र हैं। नियमत: प्रत्येक स्वास्थ्य केंद्र पर एक बाल रोग विशेषज्ञ की तैनाती हर हाल में होनी चाहिए, लेकिन जिले में ऐसा नहीं हो रहा है।
हालत यह है कि 14 सीएचसी में मात्र दो पर बाल रोग विशेषज्ञ की तैनाती है। ऐसे में ठंड के मौसम में बुखार, सांस रोग, ब्रेन और इंफेक्शन से सीएचसी पहुंचने वाले अधिकांश नवजात शिशुओं को चिकित्सक जिला अस्पताल रेफर कर देते हैं।
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रेफर होने वाले शिशुओं में अधिकांश शिशुओं की समय से उपचार नहीं मिल पाने के कारण रास्ते में मौत हो जाती है। शनिवार को अमर उजाला ने सीएचसी का जायजा लिया तो हालात खराब मिले।
शनिवार की सुबह 11 बजे सीएचसी कुड़वार पर सीएचसी अधीक्षक डॉ. अनवर आलम खां मौजूद मिले। सीएचसी पर क्षेत्र के रवनिया पूरब गांव से मीरा यादव अपने नवजात को लेकर पहुंची थी। नवजात को देखने के लिए कोई बाल रोग विशेषज्ञ मौजूद नहीं था।
सीएचसी अधीक्षक ने नवजात को देखा और वजन कम होने के कारण उसे एसएनसीयू (सिक न्यू बांड केयर यूनिट) जिला महिला अस्पताल के लिए रेफर कर दिया। सीएचसी अधीक्षक ने बताया कि बाल रोग विशेषज्ञ नहीं होने के कारण ऐसा करना पड़ता है।
शनिवार की सुबह 10 बजे सीएचसी मोतिगरपुर पर सभी चिकित्सक मौजूद मिले। सीएचसी पर बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. अवनीश मिश्र ठंड से पीड़ित छात्र कर्तिकेय शुक्ल (7) को देखते मिले। कर्तिकेय को ठंड लगी थी।
स्कूल में उसे चक्कर आने पर स्कूल प्रबंधन ने अभिभावक को सूचित कर स्वास्थ्य केंद्र भेजा था। सीएचसी प्रभारी डॉ. एचएन मौर्य के पास भी 13 माह के शुभम को लेकर उसकी मां पहुंची थी। सीएचसी प्रभारी के अनुसार शुभम का शारीरिक विकास नहीं हो रहा है। ऐसे में उसे जिला अस्पताल के एनआईसीयू (न्यू नेटल इंटेंसिव केयर यूनिट) के लिए रेफर कर दिया गया।
शहर से सटे दूबेपुर ब्लॉक में बने पीएचसी में प्रभारी/ चिकित्सक डॉ. सहाना परवीन मरीज को देखते मिली। डॉ. सहाना परवीन ने बताया कि ठंड में मरीज अधिक पहुंच रहे हैं।
जिनकी हालत खराब होती है उन्हें सीएचसी हसनपुर रेफर कर दिया जाता है। डॉ. सहाना ने कहा कि सीएचसी पर एक बाल रोग विशेषज्ञ जरूर होना चाहिए। नवजात शिशुओं का बाल रोग विशेषज्ञ ही बेहतर उपचार कर सकते हैं।
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