सूरापुर। जाति रहे, लेकिन जातिवाद नहीं होना चाहिए। आज सत्य सुनने वाले बहुत कम हो गए हैं। सब चाटुकारिता में लिप्त हैं। जो उच्च पद पर आसीन हो, उसे कभी पक्षपात नहीं करना चाहिए। परशुराम ने पक्षपात किया था। जब तक सृष्टि रहेगी, राम की पूजा सच्चे इंसान और भगवान के रूप में होगी। ये बातें तुलसी पीठाधीश्वर स्वामी
रामभद्राचार्य महाराज ने कहीं।
वह विजेथुआ महोत्सव के छठवें दिन बुधवार को वाल्मीकि रामायण सुना रहे थे। उन्होंने कहा कि राम ने परशुराम से प्रश्न किया कि आपने अनेक निर्दोष राजाओं को मारा, लेकिन ऋषि-मुनियों के हत्यारे रावण को क्यों नहीं मारा। राम के इस प्रश्न का उत्तर परशुराम नहीं दे सके। उन्हें गलती का अनुभव हुआ।
राम भद्राचार्य ने कहा कि कोई छोटा बड़ा नहीं है। देश में समान नागरिक संहिता होनी चाहिए। आरक्षण जातिगत न होकर आर्थिक आधार पर होना चाहिए। स्वामी ने कहा कि जो राम-कृष्ण के प्रेमी हैं, जो हिंदू धर्म में विश्वास करते हैं, उन सब से मैं प्रेम करता हूं। बताया कि विजेथुआ का नाम पहले विजयस्थ महावीर था। यह सिद्ध स्थल है। उन्होंने कहा कि जिसकी दृष्टि नीचे हो जाती है, सारी सृष्टि उसके नीचे हो जाती है।
कथा से पहले महोत्सव के आयोजक विवेक तिवारी के अनुज डाॅ. रत्नेश तिवारी ने सपत्नीक व्यासपीठ का पूजन किया। तुलसी पीठ के उत्तराधिकारी रामचंद्र दास ने गुरु अर्चन किया।
इस अवसर पर राज्य महिला आयोग की सदस्य नीलम प्रभात, पूर्व डीआईजी कृपा शंकर सिंह, डॉ. राम आसरे तिवारी, प्रमोद मिश्र मुन्ना सहित बड़ी संख्या में श्रोता मौजूद रहे।