अमेठी। प्रतिबंधित होने के बाद खेतों में पराली जलाना जिले के 10 किसानों को भारी पड़ा। सेटेलाइट से निगरानी में मामला प्रकाश में आने के बाद हड़कंप मच गया।
कृषि व राजस्व विभाग ने जांच करवाई तो तिलोई तहसील में तीन व गौरीगंज तहसील में पांच किसानों ने खेतों में अपशिष्ट जलाया था। जांच के बाद विभाग के निर्देश पर लेखपालों ने किसानों के खिलाफ थाने में केस दर्ज करवाया है।
पर्यावरण संतुलन बनाए रखने के लिए राष्ट्रीय हरित अधिकरण की ओर से खेतों में पराली व अपशिष्ट जलाने को प्रतिबंधित करने के बाद भी ऐसी घटनाएं थमने का नाम नहीं ले रही हैं।
जिला प्रशासन के निर्देशों की अवहेलना करते हुए खेतों में पराली जलाना जिले के आठ किसानों को भारी पड़ा है। निगरानी के लिए स्थापित सेटेलाइट विधि की रिपोर्ट मेें तिलोई तहसील के तीन गांवों व गौरीगंज तहसील के पांच गांवों में पराली जलाने का खुलासा होने पर हड़कंप मच गया।
रिपोर्ट के बाद कृषि व राजस्व की संयुक्त टीम ने जांच की तो तिलाई के पूरे जिया मजरे उडवा निवासी मो जब्बार, ओदारी निवासी मो. हारुन तथा पाकरगांव निवासी बृजभूषण और गौरीगंज तहसील के सूखी बाजगढ़ निवासी रामदेव, बलभद्रपुर निवासी रामकली, सकरावां निवासी हरिमंगल सिंह, चंदईपुर निवासी कमलेश सिंह तथा रौजा गांव निवासी अखिलेश सिंह की ओर खेतों में पराली जलाने की पुष्टि हुई।
खेत में पराली जलाने पर लेखपाल ने थाने में केस दर्ज करवाया है। जिला कृषि अधिकारी अखिलेश पांडेय ने गौरीगंज व तिलोई तहसील के आठ किसानों पर पराली जलाने का केस दर्ज होने की पुष्टि करते हुए बताया कि घटना पर अंकुश लगाने के लिए पुलिस का भी सहयोग लिया जा रहा है।
वहीं अमेठी कोतवाली क्षेत्र के गांव उमापुर गानापट्टी निवासी राम मिलन ने पिछले 18 नवंबर को खेत में पराली जलाई थी। इसकी रिपोर्ट हलका लेखपाल प्रवीण सिंह ने तहसीलदार को दी थी। इसी थाना क्षेत्र के गांव भीमी निवासी पाचूराम ने 15 नवंबर को अपने खेत में पराली जलाई थी।
इसकी रिपोर्ट हलका लेखपाल सुरेंद्र प्रसाद श्रीवास्तव ने तहसीलदार को दी थी। हलका लेखपालों की रिपोर्ट मिलने के बाद तहसीलदार पल्लवी सिंह के निर्देश पर कोतवाली पुलिस ने हलका लेखपालों की तहरीर पर दोनों किसानों के विरुद्ध केस दर्ज किया है।