गिरते भूजल स्तर को रोकने के लिए सिंचाई विभाग की ओर से तालाबों में पानी भरवाने की योजना सफल नहीं हो पा रही है। नहरों में पानी होने के बावजूद तालाबों की बात तो दूर माइनरों की टेल तक पानी नहीं पहुंच पा रहा है। जलाशयों को भरने का निर्देश अधिकारियों की उदासीनता से बेअसर होता नजर आ रहा है।
गर्मी बढने और जल संचयन नहीं होने से अधिकांश तालाब सूख गए हैं। भूगर्भ जल स्तर भी नीचे गिर रहा है। पानी के गिरते स्तर को रोकने के लिए बीती 10 मई से नहरों में पानी छोड़ने की योजना सिंचाई विभाग की ओर से बनाई गई थी। सिंचाई खंड-16 की नहरों में 1500 क्यूसेक पानी छोड़ा गया। इस समय नहरों में पर्याप्त पानी है। जिले के 434 किलोमीटर क्षेत्र में सिंचाई खंड-16 की नहरों का जाल फैला हुआ है।
इन नहरों से 121 माइनरें जुड़ी हुई हैं। स्थिति यह है कि नहरों में पर्याप्त पानी होने के बाद भी माइनरों के टेल तक पानी नहीं पहुंच पा रहा है। जलाशयों में पानी भरवाने को लेकर ग्राम सभा के लोग भी कोई ठोस कदम नहीं उठा पा रहे हैं।
14 विकास खंडों के 986 ग्राम पंचायतों में तकरीबन 4136 तालाबों का निर्माण कराया गया है। इन तालाबों में से अधिकांश जलविहीन हैं। कुछ तालाब तो चरागाह और खेल मैदान के रूप में प्रयोग किए जा रहे हैं। एक भी तालाब में नहरों के जरिए अभी तक पानी नहीं भरवाया गया है। इस संबंध में सिंचाई विभाग के अधिशाषी अभियंता मनोज सिंह से जानकारी लेने का प्रयास किया गया तो उनसे संपर्क नहीं स्थापित हो सका।